कैफे नियमों को लेकर महिंद्रा और मारुति आमने-सामने, छोटी कारों को राहत पर गहराया विवाद

Edited By Updated: 14 Jul, 2025 01:42 PM

mahindra and maruti face to face over cafe rules dispute deepens

महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखकर आगाह किया है कि अगर कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE) नियमों के तहत छोटी कारों को छूट दी गई, तो इससे उत्सर्जन में कटौती, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने और नवाचार को नुकसान...

नई दिल्लीः महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को पत्र लिखकर आगाह किया है कि अगर कॉरपोरेट औसत ईंधन दक्षता (CAFE) नियमों के तहत छोटी कारों को छूट दी गई, तो इससे उत्सर्जन में कटौती, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाने और नवाचार को नुकसान होगा। महिंद्रा का दावा है कि छोटी कारें देश में कुल यात्री वाहनों के कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन में करीब 53% योगदान देती हैं।

यह प्रतिक्रिया मारुति सुजुकी की उस मांग के जवाब में आई है, जिसमें कंपनी ने आगामी CAFE-3 और CAFE-4 नियमों में छोटी कारों के लिए छूट की मांग की है। मारुति के चेयरमैन आरसी भार्गव का तर्क है कि छोटी कारें प्रति यात्री कम ईंधन जलाती हैं और कम उत्सर्जन करती हैं, इसलिए उन्हें बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

सरकार के लिए नीति बनाना हुआ चुनौतीपूर्ण

मारुति और महिंद्रा जैसे दिग्गज वाहन निर्माताओं के बीच इस मतभेद ने ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के लिए चुनौती खड़ी कर दी है, जो अप्रैल 2027 से लागू होने वाले CAFE-3 नियमों का अंतिम मसौदा तैयार कर रहा है। नियमों का उद्देश्य वाहन निर्माताओं को बेहतर ईंधन दक्षता और कम उत्सर्जन तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

महिंद्रा का विरोध क्यों?

महिंद्रा ने अपने पत्र में कहा कि छोटी कारों को लक्षित छूट देना तीन मोर्चों पर प्रगति को बाधित करेगा:

  • उत्सर्जन में कटौती की दिशा में रुकावट
  • EV को अपनाने में धीमापन
  • भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में गिरावट

महिंद्रा का मानना है कि अगर EV को केवल बड़ी कारों तक सीमित रखा गया, तो 2030 तक 30% इलेक्ट्रिक वाहनों का राष्ट्रीय लक्ष्य प्रभावित होगा। कंपनी ने यह भी प्रस्ताव दिया कि EV को औसत उत्सर्जन कैलकुलेशन में अधिक वेटेज (वॉल्यूम डेरोगेशन फैक्टर 4) दिया जाए, जिससे EV निवेश को प्रोत्साहन मिले।

मारुति की दलील क्या है?

मारुति सुजुकी का मानना है कि CAFE नियम यूरोप के बड़े कार बाजारों पर आधारित हैं, जहां छोटी कारों की उपस्थिति नगण्य है। भार्गव के अनुसार, भारत में छोटी कारें आम आदमी के लिए सुरक्षित, सस्ती और ईंधन-किफायती विकल्प हैं और इन पर ज्यादा कर और सख्त नियम लगाना अनुचित है।

क्या है आगे की राह?

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के मसौदे के अनुसार, वाहन निर्माताओं को CAFE-3 के तहत 33% तक उत्सर्जन में कटौती करनी होगी, जो मौजूदा CAFE-2 की तुलना में अधिक सख्त है। वहीं कुछ निर्माता नीति में निरंतरता और व्यावहारिक लक्ष्य तय करने की मांग कर रहे हैं।
 

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