अमेरिका-द. कोरिया को धमकी के बाद एक्शन में सनकी किंग, उत्तर कोरिया ने दागी 10 बैलिस्टिक मिसाइलें

Edited By Updated: 14 Mar, 2026 12:23 PM

north korea fires possible missile towards sea during us south korea drills

उत्तर कोरिया ने 14 मार्च 2026 को अपने सुनान क्षेत्र से पूर्वी समुद्र की ओर कम से कम एक नहीं, बल्कि 10 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह प्रक्षेपण अमेरिका-दक्षिण कोरिया के ‘फ्रीडम शील्ड’ सैन्य अभ्यास के बीच हुआ, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव...

International Desk: उत्तर कोरिया  के सनकी किंग मि जोंग उन ने  अपने पूर्वी समुद्र की ओर कम से कम 10 मिसाइलें दागीं। शुरुआती जानकारी में   एक प्रक्षेपास्त्र” की बात कही गई थी, लेकिन बाद की रिपोर्टों में कहा गया कि 10 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। ये लॉन्च सुनान क्षेत्र से लगभग दोपहर 1:20 बजे के आसपास दर्ज किए गए। दक्षिण कोरिया की सेना  के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) ने पहले केवल इतना कहा था कि एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र पूर्व दिशा में छोड़ा गया है। बाद में स्थानीय और क्षेत्रीय रिपोर्टों में साफ हुआ कि यह केवल एक नहीं, बल्कि कई मिसाइलों का प्रक्षेपण था।

 

 प्रक्षेपण अभी क्यों अहम ?
यह लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया का संयुक्त सैन्य अभ्यास Freedom Shield 26 चल रहा है। यह अभ्यास 9 मार्च से 19 मार्च 2026 तक निर्धारित है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया इसे रक्षा-उन्मुख और संयुक्त तैयारी का अभ्यास बताते हैं, लेकिन उत्तर कोरिया लंबे समय से इन्हें अपने खिलाफ “हमले की रिहर्सल” कहता आया है।

 

उत्तर कोरिया पहले ही चेतावनी दे चुका 
इस प्रक्षेपण से कुछ दिन पहले, उत्तर कोरिया की वरिष्ठ नेता किम यो जोंग ने अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यासों को “उकसाने वाला” बताया था और कहा था कि इससे “भयानक परिणाम” हो सकते हैं। शनिवार का मिसाइल लॉन्च उसी चेतावनी के बाद आया है, इसलिए इसे सीधे सैन्य और राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

 
जापान ने निगरानी बढ़ाई
जापान की ओर से भी निगरानी बढ़ाई गई और रिपोर्टों में कहा गया कि प्रक्षेपास्त्र जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र के बाहर गिरा। इस घटना ने पूर्वी एशिया में सुरक्षा चिंता फिर बढ़ा दी है, खासकर तब जब उत्तर कोरिया पहले से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को तेज कर चुका है। 2019 में अमेरिका-उत्तर कोरिया वार्ता टूटने के बाद से कूटनीतिक रास्ता लगभग ठप पड़ा है। इस बीच प्योंगयांग ने अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाई है और रूस के साथ उसके संबंध भी गहरे हुए हैं। ऐसे माहौल में हर नया मिसाइल परीक्षण केवल सैन्य घटना नहीं, बल्कि रणनीतिक दबाव की चाल भी माना जाता है।

 

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