अमेरिका-ईरान जंग का फायदा उठा रहा रूस, रोज कमा रहा 150 मिलियन डॉलर, सदमे में ट्रंप !

Edited By Updated: 14 Mar, 2026 04:24 PM

russia is emerging as a winner from the iran war

तेल बाजार में उथल-पुथल और मध्य-पूर्व तनाव के कारण रूस को भारी आर्थिक फायदा मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार तेल की ऊंची कीमतों और आपूर्ति संकट से रूस को रोज लगभग 150 मिलियन डॉलर अतिरिक्त कमाई हो रही है, जिससे युद्ध के आर्थिक दबाव को संतुलित करने में...

International Desk: मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता के बीच रूस तेल कारोबार से भारी आर्थिक लाभ कमा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण रूस को रोजाना करीब 150 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त कमाई हो रही है। ईरान से जुड़े तनाव के बाद Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। जब इस रास्ते पर खतरा बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से ऊपर चली जाती हैं।

 

तेल 100 डॉलर के पार
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत लगभग 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि West Texas Intermediate करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कुछ समय के लिए कीमतें 119 डॉलर तक भी चली गई थीं, जो 2022 के बाद सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।2022 में Russian invasion of Ukraine के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस के तेल पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिका ने रूसी तेल और गैस आयात पर रोक लगा दी। 
European Union और G7 देशों ने रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल का प्राइस कैप लागू किया। इसका उद्देश्य रूस की आय सीमित करना था ताकि वह युद्ध के लिए पैसा न जुटा सके।

 

भारत और चीन बने बड़े खरीदार
प्रतिबंधों के बाद रूस ने एशिया का रुख किया और भारी छूट देकर तेल बेचना शुरू किया।India और China रूस के सबसे बड़े खरीदार बन गए।भारत ने पश्चिम एशिया की बजाय रूसी तेल की खरीद में बड़ा इजाफा किया।रूस ने अपनी तथाकथित “शैडो फ्लीट” के जरिए तेल की सप्लाई जारी रखी।

 

ट्रंप प्रशासन की नई रणनीति
2025 में सत्ता में लौटे Donald Trump ने रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की कोशिश की, लेकिन बातचीत सफल नहीं रही।इसके बाद अमेरिका ने भारत समेत कुछ देशों पर दबाव डाला और रूसी तेल खरीद पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी।हालांकि वैश्विक तेल आपूर्ति बनाए रखने के लिए अमेरिका ने कुछ समय के लिए रूस के पहले से ट्रांजिट में मौजूद तेल की बिक्री की अनुमति भी दी।

 

क्यों रूस बन रहा ‘अर्ली विनर’?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव लंबा चलता है तो रूस को और फायदा मिल सकता है क्योंकि वैश्विक तेल कीमतें ऊंची रहेंगी। रूस को तेल पर कम छूट देनी पड़ेगी और ऊर्जा निर्यात से सरकारी आय बढ़ेगी। लंदन के थिंक टैंक Royal United Services Institute के विशेषज्ञों के अनुसार, जितनी देर तक कीमतें ऊंची रहेंगी, रूस उतनी ही आसानी से अपने तेल को वैश्विक बाजार में कम छूट पर बेच सकेगा। रूस की इस जीत से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुतिन विरोधी फैसलों को  बड़ा झटका माना जा रहा है। 

 

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा
तेल की बढ़ती कीमतें कई देशों के लिए चिंता का विषय हैं। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और  ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा जिससे 
वित्तीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ सकती है। अगर पश्चिम एशिया का संकट और गहरा हुआ तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।
 

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