Petrol-Diesel Export Duty: पेट्रोल-डीजल के निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव, आज से लागू नई दरें

Edited By Updated: 01 Jun, 2026 11:10 AM

major change in petrol and diesel export duties new rates effective from today

केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए 1 जून 2026 से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क (Export Duty) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, अब पेट्रोल के...

बिजनेस डेस्कः केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए 1 जून 2026 से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क (Export Duty) में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। वित्त मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना के मुताबिक, अब पेट्रोल के निर्यात पर 1.50 रुपए प्रति लीटर, डीजल पर 13.50 रुपए प्रति लीटर और विमान ईंधन (ATF) पर 9.50 रुपए प्रति लीटर का टैक्स लगेगा। पहले प्रति लीटर पेट्रोल पर 3 रुपए, डीजल पर 16.50 रुपए और ATF पर 16 रुपए शुल्क देना होता था। पेट्रोल और डीजल पर लिया जाने वाला यह टैक्स 'स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी' (SAED) के रूप में वसूला जाएगा। 

सरकार की ओर से जारी ताजा नोटिफिकेशन के मुताबिक, यह नई दरें 1 जून 2026 से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं। यह नया प्राइस रिवीजन अगले 15 दिनों तक प्रभावी रहेगा। सरकार हर दो हफ्ते में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर इन दरों की समीक्षा करती है ताकि घरेलू आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के बीच संतुलन बना रहे।

क्‍या कम होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? 

पेट्रोल और डीजल पर टैक्‍स कटौती के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार के इस फैसले का आम लोगों पर क्‍या असर होगा, क्‍या इससे देश में पेट्रोल और डीजल के दाम (Petrol Diesel Prices) कम हो जाएंगे। इस सवाल का सीधा-सा जवाब है- नहीं, इस फैसले से घरेलू लेवल पर पेट्रोल-डीजल के दाम कम नहीं होंगे।

एक्‍सपोर्ट ड्यूटी कम करने का सीधा मतलब है कि देश से बाहर तेल बेचने पर तेल कंपनियां सरकार को कम टैक्‍स देंगी यानी इससे तेल कंपनियों को तो राहत मिलेगी लेकिन आम आदमी को पेट्रोल-डीजल खरीदने में राहत नहीं मिलेगी।

समय-समय पर समीक्षा करती है सरकार 

केंद्र सरकार ने इसी साल 27 मार्च 2026 को पहली बार पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) और रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस (RIC) लगाया था, जिसका उद्देश्‍य कंपनियों की ओर से किए जा रहे पेट्रोल, डीजल और एटीएफ के ज्‍यादा निर्यात को रोकना और घरेलू बाजार में पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना था।

इससे पहले डीजल पर निर्यात शुल्क में कई बार बदलाव किया गया। 26 मार्च को इसे 21.50 रुपए प्रति लीटर तय किया गया था, जिसे 11 अप्रैल को बढ़ाकर 55.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया। बाद में 30 अप्रैल को इसे घटाकर 23 रुपए प्रति लीटर किया गया और अब इसे और कम करके 13.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। एटीएफ पर भी शुल्क में कई बदलाव हुए। शुरुआत में यह 29.5 रुपए प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 42 रुपए प्रति लीटर किया गया। बाद में इसे घटाकर 33 रुपए प्रति लीटर किया गया और अब इसे और कम करके 9.5 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है।
 

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