कच्चा तेल 90 डॉलर के पार रहा तो महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल: BPCL

Edited By Updated: 24 Jul, 2026 12:44 PM

petrol and diesel prices could rise if crude oil stays above 90 bpcl

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर अब घरेलू ईंधन बाजार पर भी पड़ सकता है। सरकारी तेल विपणन कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने संकेत दिया है कि यदि कच्चा तेल लंबे समय तक 90 डॉलर प्रति बैरल

बिजनेस डेस्कः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर अब घरेलू ईंधन बाजार पर भी पड़ सकता है। सरकारी तेल विपणन कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने संकेत दिया है कि यदि कच्चा तेल लंबे समय तक 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में संशोधन करना पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि फिलहाल बाजार की स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अंतिम फैसला वैश्विक कीमतों की दिशा पर निर्भर करेगा।

तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है असर

बीपीसीएल के निदेशक (वित्त) वेत्सा रामकृष्ण गुप्ता ने कहा कि हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। कंपनी का मानना है कि यदि यह तेजी अस्थायी साबित होती है तो कीमतों में बदलाव की जरूरत नहीं होगी लेकिन लंबे समय तक ऊंचे स्तर बने रहने पर लागत का दबाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर का क्रूड ऑयल तेल विपणन कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर असर डालता है।

वैश्विक आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच बीपीसीएल आयात स्रोतों में विविधता लाने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी अमेरिका के साथ दीर्घकालिक कच्चे तेल आपूर्ति समझौते पर विचार कर रही है। इसके अलावा, बेहतर कीमत मिलने की स्थिति में वेनेजुएला और अंगोला जैसे देशों से भी टर्म कॉन्ट्रैक्ट किए जा सकते हैं। कंपनी का उद्देश्य किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम कर घरेलू बाजार के लिए निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।

LPG सप्लाई के नए स्रोतों पर काम

बीपीसीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संजय खन्ना ने कहा कि रूस, अमेरिका और अन्य देशों से कच्चे तेल की खरीद बढ़ाने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं। वहीं एलपीजी आपूर्ति के लिए भी कई नए स्रोतों पर काम किया जा रहा है, ताकि वैश्विक संकट का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर कम से कम पड़े।

कंपनी ने स्वीकार किया कि ऊंची कच्चे तेल की कीमतों और ईंधन दरों में देरी से हुए संशोधन का असर उसकी वित्तीय स्थिति पर पड़ा है। एलपीजी बिक्री पर बढ़ती अंडर-रिकवरी को लेकर कंपनी ने केंद्र सरकार से सहायता की उम्मीद जताई है। साथ ही, घरेलू ईंधन आपूर्ति प्रभावित न हो, इसके लिए रिफाइनरियों के निर्धारित रखरखाव कार्य भी आगे के महीनों तक टाल दिए गए हैं।

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