Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 Jun, 2026 02:42 PM

देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत मांग, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नए कारोबार से मिले सहारे के दम पर मई में तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। हालांकि मुद्रास्फीति का दबाव बना रहा। सोमवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई।...
नई दिल्लीः देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां मजबूत मांग, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नए कारोबार से मिले सहारे के दम पर मई में तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई। हालांकि मुद्रास्फीति का दबाव बना रहा। सोमवार को जारी मासिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) मई में 55.0 रहा, जो अप्रैल के 54.7 से अधिक है। यह पिछले तीन महीनों में क्षेत्र की स्थिति में सबसे मजबूत सुधार को दर्शाता है। खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर का अंक विस्तार जबकि 50 से नीचे का अंक संकुचन दर्शाता है।
उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने फरवरी के बाद सबसे तेज गति से नए ऑर्डर और उत्पादन में वृद्धि दर्ज की। इसके पीछे मांग में मजबूती, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं और नए कारोबार मुख्य वजह रहे। एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी (भारत) ने कहा, '' पश्चिम एशिया में संघर्ष के न सुलझने के कारण एहतियाती तौर पर भंडारण बढ़ाने का संकेत मिल रहा है। उत्पादन वृद्धि तेज हुई है जबकि खरीद गतिविधि एवं तैयार माल के भंडार में भी तेजी आई।''
आंकड़ों से पता चला कि घरेलू बाजार ने वृद्धि को गति दी, जबकि निर्यात ऑर्डर में वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही। कीमतों के मोर्चे पर पश्चिम एशिया संघर्ष का असर लागत पर बना रहा जहां ऊर्जा, ईंधन, कच्चे माल और परिवहन पर खर्च बढ़ा। उन्होंने कहा, ''कच्चे माल की लागत में वृद्धि थोड़ी कम हुई लेकिन उत्पादन कीमतों में वृद्धि और ज्यादा धीमी पड़ी जिससे विनिर्माताओं के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।'' उच्च लागत के बावजूद कंपनियों ने मई में अधिक कच्चा माल खरीदा और खरीद का स्तर तीन महीने के उच्च स्तर पर रहा। इसके पीछे भंडार बढ़ाने की कोशिशें प्रमुख रहीं।
उत्पादन की बढ़ती जरूरतों से विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन भी जारी रहा, हालांकि इसकी गति अप्रैल की तुलना में थोड़ी धीमी रही। व्यापारिक भरोसा सकारात्मक बना रहा, कंपनियों को उम्मीद है कि साल के अंत तक लागत का दबाव कम होगा। विज्ञापन और मजबूत ऑर्डर बुक ने भी भविष्य की वृद्धि को लेकर आशावाद को सहारा दिया। एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल ने करीब 400 कंपनियों के एक समूह में क्रय प्रबंधकों को भेजे गए सवालों के जवाबों के आधार पर तैयार किया है।