देश में विनिर्माण गतिविधियों की वृद्धि जुलाई में पांच साल के निचले स्तर पर

Edited By Updated: 03 Aug, 2026 04:16 PM

manufacturing activity in the country hits a five year low in july

देश में विनिर्माण गतिविधियों की वृद्धि जुलाई में घटकर पांच साल के निचले स्तर पर आ गई। मुख्य रूप से चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों के बीच नए कारोबारी ऑर्डर की रफ्तार धीमा पड़ने से वृद्धि कम रही। यह जानकारी सोमवार को जारी एक मासिक

नई दिल्लीः देश में विनिर्माण गतिविधियों की वृद्धि जुलाई में घटकर पांच साल के निचले स्तर पर आ गई। मुख्य रूप से चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों के बीच नए कारोबारी ऑर्डर की रफ्तार धीमा पड़ने से वृद्धि कम रही। यह जानकारी सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में दी गई। मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) जुलाई में घटकर 53.5 पर आ गया जो जून में 54.2 था। यह अगस्त, 2021 के बाद का सबसे निचला स्तर है और दीर्घकालिक औसत 54.2 से भी कम है। 

एचएसबीसी इंडिया क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) नए ऑर्डर, उत्पादन, रोजगार, आपूर्तिकर्ताओं की डिलिवरी अवधि और खरीदे गए माल भंडार जैसे संकेतकों के आधार पर स्थिति का आकलन करता है। क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) में 50 से ऊपर का स्तर गतिविधियों में विस्तार और 50 से नीचे का स्तर गिरावट को दर्शाता है। नए ऑर्डर में वृद्धि की दर जुलाई में चार वर्षों से अधिक समय में दूसरी सबसे कमजोर रही। सर्वेक्षण में शामिल कंपनियों ने बताया कि विज्ञापन और मांग में मजबूती से बिक्री को कुछ सहारा मिला, लेकिन चुनौतीपूर्ण बाजार परिस्थितियों और प्रमुख उत्पादों में ग्राहकों की घटती रुचि ने इसे प्रभावित किया। 

सर्वेक्षण में रोजगार के मोर्चे पर कहा गया कि भारत के विनिर्माण उद्योग में रोजगार सृजन लगातार तीसरे महीने कमजोर रहा। रोजगार वृद्धि की दर मौजूदा 29 महीने की निरंतर वृद्धि अवधि में सबसे धीमी रही। जुलाई में कंपनियों ने आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखा। वास्तव में कच्चे माल की डिलिवरी में लगने वाला समय सर्वेक्षण के इतिहास में लगभग रिकॉर्ड तेजी से घटा। इससे आपूर्ति श्रृंखला में उल्लेखनीय सुधार का संकेत मिला। 

एचएसबीसी की मुख्य भारत अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने कहा, ''आपूर्तिकर्ताओं के डिलिवरी समय सूचकांक में जुलाई में वृद्धि हुई। यह इस बात का संकेत है कि आपूर्ति श्रृंखला में देरी लगातार कम हो रही है। हालांकि, पश्चिम एशिया में फिर से बढ़ते तनाव ने इन सुधारों के लंबे समय तक बने रहने को लेकर आशंकाएं पैदा की हैं।'' उन्होंने कहा कि विनिर्माता कंपनियां संभावित व्यवधानों से बचाव के लिए तैयारी कर रही हैं। कच्चे माल और तैयार माल दोनों का भंडार बढ़ा है और खरीदारी की मात्रा में भी वृद्धि हुई है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां आपूर्ति सुनिश्चित कर संभावित जोखिम को सीमित करने का प्रयास कर रही हैं। 

भंडारी ने कहा, ''इस बीच उत्पादन और नए निर्यात ऑर्डर में मजबूती आई है। यह विशेष रूप से विदेशी बाजारों से मजबूत मांग का संकेत देती है। मूल्य दबाव के रुख में भी बदलाव आया है। कच्चे माल की मुद्रास्फीति कम हुई लेकिन उत्पादों की बिक्री कीमतों के मामले में महंगाई तेज हुई। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां अपने मार्जिन की सुरक्षा के लिए लागत वृद्धि ग्राहकों पर डाल रही हैं।'' इस बीच, लागत का दबाव घटकर पांच महीने के सबसे निचले स्तर पर आ गया। हालांकि, कंपनियों ने विशेष रूप से परिवहन लागत में वृद्धि की जानकारी दी। वहीं बिक्री कीमतों में मध्यम स्तर की वृद्धि दर्ज की गई, जो जून के स्तर के लगभग समान रही। 

सर्वेक्षण में कहा गया, ''नए निर्यात ऑर्डर में तेज वृद्धि एक सकारात्मक संकेत है। साथ ही कारोबारी भरोसे में भी हल्का सुधार देखने को मिला।'' विदेशी ऑर्डर में उल्लेखनीय और तेज वृद्धि दर्ज की गई। कंपनियों ने कनाडा, मिस्र, इंडोनेशिया, केन्या, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका, थाइलैंड और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों से ऑर्डर बढ़ने की जानकारी दी। जून के हाल के निचले स्तर की तुलना में कारोबारी भरोसा मजबूत हुआ। कंपनियों ने मांग, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और नए ग्राहकों की पूछताछ को लेकर सकारात्मक रुख जताया। कुछ कंपनियों को उम्मीद है कि बाजार की स्थिति में सुधार होगा और उनकी विपणन पहल का बेहतर परिणाम मिलेगा। एचएसबीसी इंडिया विनिर्माण पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल ने करीब 400 कंपनियों के एक समूह में क्रय प्रबंधकों को भेजे गए सवालों के जवाबों के आधार पर तैयार किया जाता है।  

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