एसएंडपी, फिच समेत चार एजेंसियों ने भारत की GDP वृद्धि का अनुमान बढ़ाया

Edited By Updated: 23 Sep, 2026 06:22 PM

four agencies including s p and fitch have raised india s gdp growth forecast

वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी और फिच, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने बुधवार को भारत की वित्त वर्ष 2026-27 की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर करीब सात प्रतिशत कर दिया है। एजेंसियों ने अप्रैल-

नई दिल्लीः वैश्विक रेटिंग एजेंसी एसएंडपी और फिच, एशियाई विकास बैंक (एडीबी) तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने बुधवार को भारत की वित्त वर्ष 2026-27 की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर करीब सात प्रतिशत कर दिया है। एजेंसियों ने अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन और घरेलू मांग में मजबूती को इसका आधार बताया। इसके अलावा, एसएंडपी और फिच ने कहा कि मुद्रास्फीति का दबाव भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को चालू साल में नीतिगत दर रेपो को कम-से-कम 0.25 प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है। 

एसएंडपी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। उसने मजबूत आर्थिक गतिविधियों को इसका कारण बताया और वित्त वर्ष 2026-27 में आरबीआई द्वारा ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान जताया। एसएंडपी ने कहा कि मजबूत औद्योगिक गतिविधियों, स्वस्थ खपत, वस्तुओं के मजबूत निर्यात और सरकारी निवेश में तेजी जैसे कारकों ने आर्थिक वृद्धि को गति दी है। 

एसएंडपी ने कहा, ''इसी कारण हमने 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान पहले के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत किया गया है।'' हालांकि, उसने कहा कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि की रफ्तार कम हो सकती है, क्योंकि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) को युक्तिसंगत बनाये जाने और आयकर में कटौती से मिलने वाला लाभ कम हो जाएगा। एसएंडपी ने कहा, ''हमारा अनुमान है कि परिस्थितियां ऊंची ब्याज दरों के पक्ष में जाएंगी। इसके समर्थन में मजबूत वृद्धि, लगातार मुद्रास्फीति का दबाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मौसम संबंधी जोखिम शामिल हैं।'' 

एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति औसतन 5.1 प्रतिशत रहने और आरबीआई द्वारा नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान जताया। फिच रेटिंग्स ने भी बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया। फिच ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है कि ''2026 की पहली छमाही में अमेरिकी-ईरान युद्ध से लगे झटके के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है।'' 

फिच के अनुसार, शेष वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि की गति धीमी पड़ने की संभावना है। इसके कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। फिच ने इस साल दिसंबर में मुद्रास्फीति 5.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। फिच ने अपनी 'वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट' में कहा कि ऊर्जा कीमतों में झटके के बावजूद वैश्विक वृद्धि मजबूत बनी हुई है लेकिन वास्तविक ब्याज दरें बढ़ रही हैं। एजेंसी ने वैश्विक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 0.20 प्रतिशत बढ़ाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है। 

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) ने मजबूत घरेलू मांग और सरकारी नीतियों को देखते हुए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 0.80 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। इसके पहले जून में ओईसीडी ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। वहीं एशियाई विकास बैंक (एडीबी) ने भी बुधवार को चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई में लगाए गए 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया। एडीबी ने कहा कि वृद्धि को मजबूत निवेश मांग, लचीले उपभोग और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों में ठोस वृद्धि से समर्थन मिल रहा है। 

'एशियन डेवलपमेंट आउटलुक' में कहा गया कि अर्थव्यवस्था को उम्मीद से कम आपूर्ति व्यवधान, पूंजी के लगातार प्रवाह और बढ़ी हुई कच्चे माल की लागत का उपभोक्ता कीमतों पर सीमित असर से भी फायदा हुआ है। इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव को कम करने में मदद मिली। भारत के लिए एडीबी के कंट्री निदेशक मियो ओका ने कहा कि आपूर्ति संबंधी व्यवधानों और जिंसों की ऊंची कीमतों के बावजूद मजबूत बुनियादी ढांचा खर्च तथा वृद्धि को समर्थन देने वाली राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती दिखा रही है। 

पेरिस स्थित ओईसीडी ने बुधवार को जारी अपने अंतरिम आर्थिक परिदृश्य में कहा कि जी20 में शामिल भारत जैसी कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि मजबूत घरेलू मांग और सरकार की उन नीतियों से समर्थित रही, जिन्होंने ऊंची ऊर्जा कीमतों के असर से परिवारों और कंपनियों को राहत दी। ओईसीडी ने कहा, ''भारत की आर्थिक वृद्धि वित्त वर्ष 2025-26 के 7.8 प्रतिशत से घटकर 2026-27 में 7.1 प्रतिशत और 2027-28 में 6.5 प्रतिशत रह सकती है।'' इसके साथ ही, ओईसीडी ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत महंगाई के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अस्थायी रूप से नीतिगत दर बढ़ा सकता है।

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