Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 May, 2026 03:41 PM

शेयर बाजार में 6 मई को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह में शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक अच्छी मजबूती के साथ खुले लेकिन कुछ ही घंटों ने बाजार ने अपनी ज्यादातर बढ़त गंवा दी। फिर, 2 बजे के बाद बाजार में जबरदस्त तेजी आई। इसकी वजह अमेरिका और ईरान...
Why market Hike Today: शेयर बाजार में 6 मई को जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह में शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक अच्छी मजबूती के साथ खुले लेकिन कुछ ही घंटों ने बाजार ने अपनी ज्यादातर बढ़त गंवा दी। फिर, 2 बजे के बाद बाजार में जबरदस्त तेजी आई। इसकी वजह अमेरिका और ईरान के जल्द डील की उम्मीद है। इस खबर से जहां मार्केट में रिकवरी आई वही क्रूड में बड़ी गिरावट दिखी।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 940.73 अंक यानी करीब 1.22 फीसदी चढ़कर 77,958.52 अंक पर आ गया। निफ्टी 298.15 अंक यानी 1.24 फीसदी चढ़कर अंक चढ़कर 24,330.95 के स्तर पर बंद हुआ। मंगलवार को अमेरिकी बाजार के प्रमुख सूचकांक अच्छी तेजी के साथ बंद हुए थे।
इन वजहों से बाजार में आई जबरदस्त रिकवरी...
बैंक शेयरों में जबरदस्त खरीदारी
शेयर बाजार में रिकवरी में बैंकिंग शेयरों का बड़ा हाथ रहा। सरकार ने मध्यपूर्व में लड़ाई से प्रभावित बिजनेसेज को राहत देने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम को मंजूरी दी है। इसका असर 6 मई को बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिला। इससे बैंक निफ्टी 1 फीसदी से ज्यादा चढ़ा। निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में तो 1.6 फीसदी उछाल दिखा।
अमेरिका-ईरान में डील की उम्मीद
अमेरिका और ईरान में डील की उम्मीद बढ़ी है। इसका बाजार पर पॉजिटिव असर पड़ा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' बंद करने का ऐलान किया है। इससे दोनों पक्षों के बीच सुलह की उम्मीद बढ़ी है। अमेरिकी सरकार ने यह भी कहा कि उसका 'Operation Epic Fury' पूरा हो गया है। इसका मतलब है कि मध्यपूर्व में तनाव जल्द खत्म हो सकता है।
क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट
क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड का भाव 6 फीसदी गिरकर 104 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इस हफ्ते की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड का भाव 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। क्रूड में गिरावट भारत सहित पूरी दुनिया के लिए अच्छी खबर है। इसका पॉजिटिव असर शेयर बाजार पर पड़ा।
वैश्विक संकेतों का असर
मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में मजबूती के साथ बंद होने के बाद एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं, तो बाजार में स्थिरता और तेजी जारी रह सकती है।