Panchak May 2026: सावधान! रविवार से शुरू हो रहा है 'रोग पंचक', भूलकर भी न करें ये 5 काम, मंडरा रहा है सेहत पर बड़ा खतरा

Edited By Updated: 06 May, 2026 10:08 AM

panchak may 2026

Panchak May 2026 Dates: मई 2026 में 10 मई से 'रोग पंचक' शुरू हो रहा है। जानिए रविवार से शुरू होने वाले इस पंचक का समय, सावधानियां और ज्योतिषीय उपाय।

Panchak May 2026: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले 'मुहूर्त' का विशेष ध्यान रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, मई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील रहने वाला है, क्योंकि इस महीने 'रोग पंचक' का साया रहने वाला है। ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र होते हैं। इन 27 नक्षत्रों में से अन्तिम 5 नक्षत्र  ‘धनिष्ठा’, ‘शतभिषा’, ‘पूर्वा भाद्रपद’, ‘उत्तरा भाद्रपद’ एवं ‘रेवती’ ये दूषित नक्षत्रों की श्रेणी में आते हैं। प्रत्येक नक्षत्र में 4 चरण होते हैं इसलिए धनिष्ठा नक्षत्र के तीसरे चरण से लेकर रेवती नक्षत्र के चतुर्थ चरण तक पंचक समय होता है। जब तक इन 5 नक्षत्रों का समय चलता है तब तक 5 दिनों तक पंचक लगा रहता है।

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कब से कब तक रहेगा पंचक का साया?
इस बार पंचक की शुरुआत 10 मई 2026, रविवार को दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से हो रही है। यह अवधि 5 दिनों तक जारी रहेगी और 14 मई, गुरुवार को रात 10 बजकर 34 मिनट पर इसका समापन होगा। अगर पंचक रविवार को शुरू होते हैं तो अशुभ होते हैं तथा व्यक्ति को रोग और मानसिक पीड़ा देतें हैं।

पंचक दोष 
पंचक का अधिकतर विचार मृत्यु के समय किया जाता है जैसे अगर किसी की मृत्यु पंचक के दौरान हो गई तो उसके परिवार के 5 सदस्यों पर मृत्युतुल्य कष्ट आता है या कहा जा सकता है कि परिवार में 5 लोगों की भी मृत्यु होगी इसलिए अगर किसी की मृत्यु पंचक में हो जाए तो उसके दाह संस्कार के दौरान चावल और आटे को मिलाकर अथवा कुश घास के पांच पुतले बनाकर उनका भी शव के साथ दाह संस्कार किया जाए तो पंचक का दोष नष्ट हो जाता है।

रविवार से शुरू होने वाला पंचक है खतरनाक?
ज्योतिष विद्वानों की गणना के अनुसार, जब पंचक रविवार से आरंभ होता है, तो उसे 'रोग पंचक' कहते हैं। अपने नाम के अनुरूप ही यह किसी भी व्यक्ति की सेहत के लिए घातक माना गया है। रोग पंचक के दौरान:
शरीर की इम्यूनिटी में कमी आ सकती है।
पुराने रोग फिर से अपना प्रभाव दिखाने लगते हैं।
मानसिक तनाव, डिप्रेशन, बेचैनी और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बनी रहती है।
सकारात्मक ऊर्जा पर नकारात्मकता हावी रहती है।
न चाहते हुए भी काम पेडिंग होते जाते हैं। बनते काम में भी अड़चने आती रहती हैं।

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