Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Jun, 2026 05:54 PM

आने वाले वर्षों में भारतीयों की जेब में रखे ₹100, ₹200 या ₹500 के नोट कागज की बजाय प्लास्टिक जैसे दिखाई दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलिमर करेंसी नोट जारी करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। हालांकि RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के...
बिजनेस डेस्कः आने वाले वर्षों में भारतीयों की जेब में रखे ₹100, ₹200 या ₹500 के नोट कागज की बजाय प्लास्टिक जैसे दिखाई दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में पॉलिमर करेंसी नोट जारी करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। हालांकि RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार यह योजना अभी शुरुआती चरण में है और इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो यह भारतीय मुद्रा व्यवस्था में सबसे बड़े बदलावों में से एक हो सकता है।
क्या होते हैं पॉलिमर नोट?
पॉलिमर नोट दिखने और इस्तेमाल में सामान्य करेंसी नोटों जैसे ही होते हैं लेकिन इन्हें कागज की बजाय विशेष प्रकार के सिंथेटिक प्लास्टिक (पॉलिमर) से बनाया जाता है। यही कारण है कि ये नोट अधिक मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित माने जाते हैं।
RBI क्यों कर रहा है विचार?
भारत में हर साल बड़ी संख्या में नोट छापे जाते हैं। कम मूल्य के नोट जल्दी फट जाते हैं, गंदे हो जाते हैं या खराब हो जाते हैं, जिसके कारण उन्हें बदलने के लिए नए नोट छापने पड़ते हैं। RBI का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले पॉलिमर नोट भविष्य में छपाई और प्रतिस्थापन की लागत कम कर सकते हैं।
नोट छापने में कितना खर्च आता है?
अनुमान के अनुसार ₹10 के नोट की छपाई पर करीब ₹1.01, ₹20 के नोट पर लगभग ₹1, ₹50 के नोट पर ₹1.22, ₹100 के नोट पर ₹1.20 से ₹1.51 और ₹500 के नोट पर करीब ₹2.29 का खर्च आता है।
हालांकि पॉलिमर नोटों की शुरुआती छपाई लागत कागजी नोटों से दो से तीन गुना अधिक हो सकती है, लेकिन उनकी लंबी उम्र इस अतिरिक्त लागत की भरपाई कर सकती है।
पॉलिमर नोटों के फायदे
- पानी से खराब नहीं होते।
- आसानी से नहीं फटते।
- गंदगी कम पकड़ते हैं।
- आधुनिक सुरक्षा फीचर्स के कारण नकली नोट बनाना कठिन होता है।
- कागजी नोटों की तुलना में कई गुना अधिक समय तक चलते हैं।
दुनिया के कई देशों में पहले से उपयोग
पॉलिमर नोट कोई नई तकनीक नहीं है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, रोमानिया, फिजी, वियतनाम और मॉरीशस जैसे कई देश वर्षों से इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं यूनाइटेड किंगडम, सिंगापुर, मलेशिया, थाईलैंड और फिलीपींस जैसे देशों में भी इनका उपयोग किया जा रहा है।
भारत में क्या होगा बदलाव?
यदि RBI इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो शुरुआत चुनिंदा मूल्यवर्ग के नोटों से की जा सकती है। पहले सीमित स्तर पर परीक्षण और उसके बाद चरणबद्ध तरीके से व्यापक लागू करने की संभावना है।
क्या पुराने नोट बंद हो जाएंगे?
फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। पॉलिमर नोट लागू होने की स्थिति में भी कागजी और पॉलिमर दोनों प्रकार के नोट कुछ समय तक समानांतर रूप से चल सकते हैं।
आम लोगों पर क्या असर होगा?
पॉलिमर नोट आने से रोजमर्रा के लेनदेन के तरीके में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि लोगों को अधिक टिकाऊ नोट मिलेंगे, फटे-पुराने नोटों की समस्या कम होगी, पानी से नुकसान का खतरा घटेगा और नकली नोटों पर भी लगाम लग सकती है।