Edited By Pardeep,Updated: 28 Jul, 2026 12:32 AM

देश में डिजिटल आंदोलनों ने एक नया इतिहास रचना शुरू कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जबरदस्त सोशल मीडिया विरोध के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब दो नए डिजिटल मोर्चों 'E20 जनता पार्टी' और 'RHA (रिजर्वेशन हटाओ...
नई दिल्ली: देश में डिजिटल आंदोलनों ने एक नया इतिहास रचना शुरू कर दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के जबरदस्त सोशल मीडिया विरोध के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब दो नए डिजिटल मोर्चों 'E20 जनता पार्टी' और 'RHA (रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन)' ने सरकार और प्रशासनिक महकमों की नींद उड़ा दी है। इंस्टाग्राम और एक्स (Twitter) अब युवाओं और जेन-जी (Gen-Z) के लिए अपनी मांगें मनवाने का नया 'जंतर-मंतर' बन चुके हैं।
E20 जनता पार्टी: "हमें चाहिए शुद्ध पेट्रोल का विकल्प"
सोशल मीडिया पर 'E20 जनता पार्टी' नाम का अभियान तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि यह कोई पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है, लेकिन इसके साथ 59 हजार से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं।
- क्या है मांग: इनकी मुख्य मांग देश के सभी फ्यूल स्टेशनों पर एथेनॉल-मुक्त 100 प्रतिशत शुद्ध ईंधन उपलब्ध कराना है।
- तर्क: आंदोलनकारियों का कहना है कि वे एथेनॉल नीति के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उपभोक्ताओं को अपनी गाड़ियों के हिसाब से सही ईंधन चुनने की आजादी मिलनी चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि "नागरिकों की गाड़ियां कोई टेस्टिंग लैब नहीं हैं," इसलिए वाहन निर्माताओं की सलाह पर ही फ्यूल मिलना चाहिए।
- गैर-राजनीतिक स्वरूप: इस मुहिम ने साफ किया है कि इसके पीछे कोई राजनीतिक हस्ती नहीं है और यह पूरी तरह आम नागरिकों द्वारा संचालित है।
RHA: "प्रतिभा को मिले प्राथमिकता, खत्म हो आरक्षण"
CJP और E20 की तर्ज पर ही एक और बड़ा डिजिटल मोर्चा खुला है, जिसे RHA यानी 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' नाम दिया गया है। सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं द्वारा शुरू किए गए इस आंदोलन का मुख्य निशाना मौजूदा जातिगत आरक्षण व्यवस्था है।
- मुख्य मांग: RHA की मांग है कि जाति आधारित आरक्षण को पूरी तरह खत्म कर शिक्षण संस्थानों और सरकारी नौकरियों में नियुक्तियां केवल मेरिट और प्रतिभा के आधार पर की जाएं।
- नारा: "सारी जातियां एक समान" के नारे के साथ यह आंदोलन युवाओं का भारी समर्थन जुटा रहा है।
- बढ़ता प्रभाव: इस ग्रुप के एडमिन ने स्पष्ट किया है कि वे किसी विशेष दल के खिलाफ नहीं, बल्कि नीतियों में सुधार के पक्षधर हैं। बिना किसी राजनीतिक समर्थन के भी इस आंदोलन को इंटरनेट पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जिस तरह से ये आंदोलन बिना किसी बड़े नेता के खड़े हो रहे हैं, उसने सरकार के सामने संवाद की नई चुनौती पेश कर दी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन उभरती मांगों पर क्या रुख अपनाता है।