Edited By jyoti choudhary,Updated: 08 Apr, 2026 12:18 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई दर 4.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है। यह आरबीआई के संतोषजनक दायरे के अंदर हैं। सरकार ने केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने का...
नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई दर 4.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया है। यह आरबीआई के संतोषजनक दायरे के अंदर हैं। सरकार ने केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रखने का लक्ष्य दिया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले, भारत के वृहद आर्थिक बुनियादी तत्व मजबूत दिख रहे थे और आर्थिक वृद्धि दर बेहतर एवं महंगाई कम रहने का आकलन किया जा रहा था। हालांकि, पश्चिम एशिया संघर्ष शुरू होने के बाद स्थिति बदल गई।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति जारी करते हुए बुधवार को कहा कि अप्रैल-जून की पहली तिमाही में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर चार प्रतिशत रहने का अनुमान है। दूसरी तिमाही में इसके 4.4 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 5.2 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 4.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है। गवर्नर ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने पाया कि पिछली नीतिगत बैठक के बाद से भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं काफी बढ़ गई हैं।
मल्होत्रा ने कहा, ''कुल महंगाई नियंत्रण में है और लक्ष्य से नीचे है। हालांकि, महंगाई के परिदृश्य के ऊपर जाने का जोखिम बढ़ गया है। इसका कारण ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का दबाव और मौसम में बदलाव है जिसकी वजह से खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर असर पड़ सकता है।'' इसके अलावा, मुख्य महंगाई का दबाव भी कम बना हुआ है। हालांकि, आपूर्ति श्रृंखला की दिक्कतों और दूसरे दौर के प्रभाव का जोखिम भविष्य में महंगाई के रास्ते को अनिश्चित बना देता है।
मल्होत्रा ने साथ ही कहा कि अर्थव्यवस्था को आपूर्ति में झटके का सामना करना पड़ रहा है। बदलते हालात, आर्थिक वृद्धि तथा महंगाई के बदलते दृष्टिकोण पर नजर रखना समझदारी होगी। इसी को देखते हुए एमपीसी ने रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रखने का फैसला किया है। खुदरा महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई थी। फरवरी के महंगाई के आंकड़े नई उपभोक्ता मूल्य श्रृंखला पर आधारित थे जिसका आधार वर्ष 2024 है।