GDP Growth Outlook: दो बड़ी एजेंसियों ने घटाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान

Edited By Updated: 19 May, 2026 04:36 PM

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भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ती दिख रही है। India Ratings and Research और ICRA ने पश्चिम एशिया संकट, महंगे कच्चे तेल, कमजोर वैश्विक मांग और रुपए में गिरावट के बीच भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान घटा दिया हैं।

बिजनेस डेस्कः भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ती दिख रही है। India Ratings and Research और ICRA ने पश्चिम एशिया संकट, महंगे कच्चे तेल, कमजोर वैश्विक मांग और रुपए में गिरावट के बीच भारत की जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान घटा दिया हैं।

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.7% रहने का अनुमान जताया है, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 6.9% अनुमान से कम है। एजेंसी के मुताबिक मांग और आपूर्ति दोनों में सुस्ती, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितताएं अर्थव्यवस्था पर दबाव बना सकती हैं।

‘अल नीनो’ के असर से कृषि उत्पादन प्रभावित 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी आ सकती है। साथ ही 2026 के मध्य से ‘अल नीनो’ के असर से कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। एजेंसी ने FY27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है। उसके अनुसार तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से आर्थिक वृद्धि दर पर करीब 0.44 प्रतिशत अंक का नकारात्मक असर पड़ सकता है।

इंडिया रेटिंग्स की निदेशक (अर्थशास्त्र) मेघा अरोड़ा ने कहा कि ऊंची महंगाई, कमजोर पूंजी प्रवाह, रुपए में गिरावट, सरकार के पूंजीगत व्यय में संभावित कमी, धीमा वैश्विक व्यापार और कमजोर औद्योगिक उत्पादन प्रमुख चुनौतियां हैं। एजेंसी ने यह भी कहा कि यदि सरकारी पूंजीगत व्यय में 10% की कटौती होती है तो वृद्धि दर करीब 6% तक फिसल सकती है।

4.4% रह सकती है खुदरा मुद्रास्फीति

एजेंसी का अनुमान है कि खुदरा मुद्रास्फीति 4.4% रह सकती है, जो RBI के लक्ष्य दायरे में होगी। वहीं रुपया औसतन 94.28 प्रति डॉलर रह सकता है। मंगलवार को रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.47 तक पहुंच गया।

ICRA का क्या है अनुमान

दूसरी ओर, ICRA ने FY2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान 6.5% से घटाकर 6.2% कर दिया है। एजेंसी ने इसके लिए पश्चिम एशिया संकट और महंगे कच्चे तेल को प्रमुख कारण बताया है।

इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री Aditi Nayar ने कहा कि अब FY27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह 85 डॉलर प्रति बैरल आंकी गई थी। उन्होंने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र की सुस्ती, निर्यात में गिरावट और पश्चिम एशिया संकट से बढ़े लागत दबाव का असर औद्योगिक गतिविधियों पर दिखाई दे रहा है।

इक्रा ने FY2025-26 की चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7% रहने का अनुमान लगाया है, जो पिछले तीन तिमाहियों का निचला स्तर होगा। एजेंसी के अनुसार औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, हालांकि कृषि क्षेत्र में मामूली सुधार की उम्मीद बनी हुई है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक वृद्धि में नरमी और पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण शिपिंग बाधाओं का असर भारत के निर्यात पर पड़ा है। मार्च तिमाही में वस्तु निर्यात सालाना आधार पर 2.8% घट गया, जबकि दिसंबर तिमाही में इसमें 1.4% की मामूली वृद्धि दर्ज की गई थी। 
 

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