Edited By Niyati Bhandari,Updated: 28 May, 2026 04:08 PM

Bakrid 2026 (Eid al-Adha): जानें, ईद-उल-अजहा (बकरीद) और हज का वास्तविक आध्यात्मिक अर्थ। हजरत इब्राहीम की कुर्बानी की याद और अहंकार को त्याग कर मानवता और भाईचारे को अपनाने का संदेश। इस्लाम के प्रमुख स्तंभ हज यात्रा और उससे जुड़ी पवित्र परंपराएं।
Bakrid 2026 (Eid al-Adha): इस्लामी वर्ष का आखिरी महीना ‘जिलहिज्जा’ अपने साथ अनगिनत रहमतें, बरकतें और आध्यात्मिक संदेश लेकर आता है। इन्हीं दिनों में दुनिया भर से लाखों मुस्लिम हज यात्रा के लिए मक्का पहुंचते हैं। इसी महीने मुस्लिम समाज ईद-उल-अजहा (बकरीद) मनाता है और हजरत इब्राहीम की याद में कुर्बानी देता है।
ईद-उल-अजहा मनाने के पीछे हजरत इब्राहीम और उनके पुत्र हजरत इस्माईल की महान कुर्बानी की घटना जुड़ी हुई है। अल्लाह ने हजरत इब्राहीम को सपने में अपने बेटे को कुर्बान करने का आदेश दिया।

हजरत इब्राहीम ने अल्लाह की इच्छा के आगे सिर झुका दिया और हजरत इस्माईल ने भी खुशी-खुशी खुद को अल्लाह की राह में कुर्बान करने के लिए तैयार कर लिया। जब हजरत इब्राहीम ने आंखों पर पट्टी बांधकर अपने बेटे को कुर्बानी के लिए लिटाया, तब अल्लाह ने उनकी जगह एक दुम्बा (जानवर) भेज दिया।

उसी याद में मुस्लिम समाज हर वर्ष ईद-उल-अजहा पर कुर्बानी करता है। यह पर्व त्याग, धैर्य, माता-पिता की आज्ञाकारिता और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश देता है।

वहीं हज इस्लाम के 5 प्रमुख स्तंभों में से एक है और हर उस मुस्लिम पर जीवन में एक बार अनिवार्य है, जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो।

मुस्लिम हज के लिए मक्का इसलिए जाते हैं ताकि वे काबा शरीफ की जियारत कर सकें और हजरत इब्राहीम, हजरत इस्माईल तथा हजरत हाजरा से जुड़ी परंपराओं को निभा सकें।

अपने पालनहार की इच्छा के सामने अपनी इच्छाओं, घमंड, ईर्ष्या और नफरत को त्याग देना ही असली सफलता है। ईद-उल-अजहा और हज के संदेश को केवल धार्मिक रस्म तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक भलाई, मानवता और भाईचारे से जोड़ना चाहिए।
