Edited By jyoti choudhary,Updated: 31 Jan, 2026 03:51 PM

बजट 2026 से पहले चांदी बाजार में तेज हलचल देखने को मिल रही है। निवेशक और इंडस्ट्री इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि बजट में लिए जाने वाले फैसले चांदी की कीमत और मांग को किस दिशा में ले जाएंगे। चांदी एक ऐसी कमोडिटी है, जो निवेश और इंडस्ट्रियल दोनों...
बिजनेस डेस्कः बजट 2026 से पहले चांदी बाजार में तेज हलचल देखने को मिल रही है। निवेशक और इंडस्ट्री इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि बजट में लिए जाने वाले फैसले चांदी की कीमत और मांग को किस दिशा में ले जाएंगे। चांदी एक ऐसी कमोडिटी है, जो निवेश और इंडस्ट्रियल दोनों जरूरतों में इस्तेमाल होती है, इसलिए बजट का असर इस पर ज्यादा पड़ता है।
जियोपॉलिटिकल तनाव और महंगाई के दबाव के बीच निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की ओर बढ़ा है, जिससे चांदी की मांग को भी सपोर्ट मिला है।
इंपोर्ट ड्यूटी सबसे बड़ा फैक्टर
भारत अपनी जरूरत की 80 फीसदी से ज्यादा चांदी आयात करता है। फिलहाल चांदी पर करीब 7.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी और 3 फीसदी GST लगता है। अगर बजट में इंपोर्ट ड्यूटी घटाई जाती है, तो घरेलू कीमतों में नरमी आ सकती है और ज्वेलरी खरीदारों व निवेशकों के लिए चांदी ज्यादा आकर्षक बन सकती है। वहीं ड्यूटी बढ़ने पर कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिससे मांग पर असर पड़ सकता है।
जेम्स एंड ज्वेलरी सेक्टर लंबे समय से इंपोर्ट ड्यूटी और GST में राहत की मांग करता रहा है, ताकि घरेलू मांग बढ़े और भारतीय प्रोडक्ट्स ग्लोबल बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकें।
ग्रीन एनर्जी और EV से बढ़ेगी डिमांड
बजट में ग्रीन एनर्जी पर फोकस चांदी की मांग के लिए अहम माना जा रहा है। सोलर पैनल निर्माण में चांदी की बड़ी भूमिका होती है। प्री-बजट संकेतों के मुताबिक, रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा देने वाली नीतियों से आने वाले समय में चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड 15 से 20 फीसदी तक बढ़ सकती है।
इसके अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल्स में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में भी चांदी का इस्तेमाल होता है। EV सेक्टर को मिलने वाला सपोर्ट चांदी की मांग को और मजबूती दे सकता है।
ETF निवेश से भी बढ़ा दबाव
पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रॉनिक्स, EV और सोलर सेक्टर से चांदी की खपत तेजी से बढ़ी है। फिलहाल इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल एप्लिकेशन कुल इंडस्ट्रियल सिल्वर डिमांड का करीब 68 फीसदी हिस्सा हैं। वहीं 2025 में सिल्वर ETF में मजबूत निवेश देखने को मिला, जिससे कुल मांग और इंपोर्ट प्रेशर बढ़ा है।