Edited By Niyati Bhandari,Updated: 18 Mar, 2026 12:16 PM

Navratri 2026 First Day: Chaitra Navratri 2026 की शुरुआत 19 मार्च से हो रही है। नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। जानिए मां शैलपुत्री की कथा, पूजा विधि, भोग और मंत्र।
Navratri 2026 First Day: हिंदू पंचांग के अनुसार, 19 मार्च 2026 को चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है और नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के पहले स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना से होती है, जिसे कलश स्थापना भी कहा जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू हो रहे हैं और 27 मार्च को खत्म होंगे। इस दौरान भक्त मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना पूजा करते हैं। बता दें कि नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद ही पवित्र माना जाता है।

कौन हैं माता शैलपुत्री?
मां शैलपुत्री नंदी नाम के वृषभ यानी बैल पर सवार होती हैं। माता के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प होता है। मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की बेटी हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण माता का नाम शैलपुत्री पड़ा। देवी भागवत पुराण के अनुसार, एक बार प्रजापति दक्ष ने अपने यहां एक विशाल यज्ञ आयोजित किया।
इस यज्ञ में उन्होंने समस्त देवी-देवताओं को बुलाया, लेकिन भगवान शिव और अपनी पुत्री पार्वती को आमंत्रण नहीं भेजा। इस पर भी देवी पार्वती ने यज्ञ में जाने की बात कही तो भगवान शिव ने देवी को यज्ञ में जाने से मना कर दिया, लेकिन माता नहीं मानीं और वे समारोह में चली गईं। यज्ञ में प्रजापति दक्ष ने देवी पार्वती और भगवान शिव का खूब अपमान किया।

माता ने तप करके महादेव को पति रूप में प्राप्त किया
भगवान शिव के अपमान से माता को बहुत दुख हुआ और उन्होंने यज्ञ की वेदी में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद देवी पार्वती ने पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लिया और माता का नाम शैलपुत्री पड़ा। इसके बाद माता ने भगवान शिव को पाने के लिए घोर तपस्या की। माता के तप से प्रसन्न हो कर महादेव पार्वती को पति रूप में मिले।

मां शैलपुत्री पूजन विधि
नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के माता शैलपुत्री रूप की पूजा की जाती है। इस दिन प्रात: जल्दी उठकर स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद मंदिर को अच्छे से साफ करें। पूजा के पहले अखंड ज्योति प्रज्वलित कर लें और शुभ मुहूर्त में घट स्थापना कर लें। अब पूर्व की ओर मुख कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और माता का चित्र स्थापित करें। सबसे पहले गणपति का आह्वान करें और इसके बाद हाथों में लाल रंग का पुष्प लेकर मां शैलपुत्री का आह्वान करें। मां की पूजा के लिए लाल रंग के फूलों का उपयोग करना चाहिए। मां को अक्षत, सिंदूर, धूप, गंध, पुष्प चढ़ाएं। माता के मंत्रों का जप करें। घी से दीपक जलाएं। मां की आरती करें। शंखनाद करें। घंटी बजाएं। मां को भोग अर्पित करें।
मां शैलपुत्री भोग
पहले दिन मां शैलपुत्री को गाय के दूध और घी से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। आप उन्हें दूध से बनी बर्फी या खीर का भोग चढ़ा सकते हैं। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
मां शैलपुत्री पूजा मंत्र
ऊँ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारुढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
