पूर्व भारतीय राजनयिक का बयानः लंबी चलेगी जंग...ईरान की ताकत से दुनिया हैरान, अमेरिका-इजराइल भी नहीं तोड़ पाए तेहरान !

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 04:40 PM

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मिडिल ईस्ट की जंग अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि रणनीति और सहनशक्ति की परीक्षा बनती जा रही है। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के दबाव के बावजूद जिस तरह खुद को संभाला है, उसने वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को बदलने के संकेत दिए हैं।

International Desk: मिडिल ईस्ट की जंग अब सिर्फ सैन्य टकराव नहीं, बल्कि रणनीति और सहनशक्ति की परीक्षा बनती जा रही है। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के दबाव के बावजूद जिस तरह खुद को संभाला है, उसने वैश्विक रणनीतिक समीकरणों को बदलने के संकेत दिए हैं। पूर्व भारतीय राजनयिक दिलीप सिन्हा ने कहा कि ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष लंबा खिंच सकता है। दिलीप सिन्हा, जो संयुक्त राष्ट्र में भारत के पूर्व स्थायी प्रतिनिधि रह चुके हैं,  का मानना है कि ईरान के खिलाफ चल रहा यह संघर्ष अब “वॉर ऑफ एट्रिशन” यानी लंबी खींचने वाली जंग में बदल सकता है।

 

उन्होंने कहा कि ईरान ने अपनी सैन्य तैयारी से सबको चौंका दिया है। ड्रोन और मिसाइलों के साथ-साथ उसने अपने हथियारों को सुरक्षित और छिपे हुए ठिकानों पर रखा है, जिससे दुश्मनों के लिए उन्हें निशाना बनाना आसान नहीं है। सिन्हा ने यह भी कहा कि भले ही ईरान के कई बड़े नेता मारे गए हों, लेकिन उसकी निर्णय लेने की क्षमता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। इसका कारण है विकेंद्रीकृत (decentralised) सिस्टम, जिसमें फैसले केवल शीर्ष नेतृत्व पर निर्भर नहीं हैं। सिन्हा ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह संकरा रास्ता भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि देश की बड़ी तेल सप्लाई यहीं से गुजरती है।

 

उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को वैकल्पिक रास्तों और ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा जा सके। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव पर भी सिन्हा ने चिंता जताई। उन्होंने अस्पताल पर हुए कथित हमले को “भयानक” बताया और कहा कि अगर पाकिस्तान आतंक के खिलाफ कार्रवाई का दावा करता है, तो उसे भारत के अधिकार को भी मानना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान पर “दोहरा रवैया” अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि वह अफगानिस्तान की कमजोर स्थिति का फायदा उठा रहा है।संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सिन्हा ने कहा कि यह एक राजनीतिक संस्था है, जहां बड़ी ताकतों का ज्यादा प्रभाव होता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल दुनिया का ध्यान मिडिल ईस्ट और यूक्रेन युद्ध पर है, इसलिए अन्य मुद्दे नजरअंदाज हो रहे हैं।
 

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