समंदर में अचानक पलटी बाज़ी: चीन का तेल ले जा रहे 7 रूसी टैंकर भारत की ओर मुड़े ! देखता रह गया ड्रैगन

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 05:39 PM

7 china bound russian oil tankers make u turn head to india

रूस का तेल लेकर चीन जा रहे कम से कम 7 टैंकर बीच समुद्र से यू-टर्न लेकर भारत की ओर मुड़ गए हैं। अमेरिका द्वारा भारत को अस्थायी छूट मिलने के बाद यह बदलाव हुआ। ईरान युद्ध से सप्लाई संकट के बीच भारत ने 30 मिलियन बैरल तेल खरीदा है।

International Desk: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध के असर के बीच वैश्विक तेल सप्लाई में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में अब रूस से तेल लेकर चीन जा रहे जहाजों ने अचानक रास्ता बदलकर भारत की ओर रुख कर लिया है जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच वैश्विक तेल राजनीति तेजी से बदल रही है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए बड़ा दांव खेला है, जिसके चलते रूस का तेल लेकर जा रहे जहाज अब रास्ता बदलकर भारत पहुंच रहे हैं।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक,  रूसी तेल के कम से कम 7 टैंकर चीन से मुड़कर भारत की ओर आ रहे हैं। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक तेल बाजार में बड़ा बदलाव हो रहा है। इसके अलावा, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी अब रूसी तेल खरीदने के लिए आगे आ सकते हैं, जिससे कीमतों में उछाल आने की संभावना है।Aqua Titan नाम का एक बड़ा तेल टैंकर, जो चीन जा रहा था, अब अचानक दिशा बदलकर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है। यह टैंकर 21 मार्च को न्यू मैंगलोर पोर्ट पहुंचने वाला है।  यह जहाज रूस के बाल्टिक सागर से ‘Urals’ क्रूड ऑयल लेकर निकला था और पहले उसका गंतव्य चीन का रिझाओ पोर्ट था। लेकिन मार्च के मध्य में, दक्षिण-पूर्व एशिया के पानी में इसने U-टर्न ले लिया।

 

इस बदलाव के पीछे बड़ी वजह अमेरिका द्वारा दी गई अस्थायी छूट है, जिसके तहत भारत को समुद्र में फंसे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी गई। Zouzou N. नाम का एक और टैंकर, जो पहले चीन के पास पहुंच चुका था, अब सिक्का पोर्ट (भारत) की ओर बढ़ रहा है और 25 मार्च तक पहुंच सकता है। यह घटनाक्रम दिखाता है कि वैश्विक संकट के समय देश अपने हितों के अनुसार तेजी से रणनीति बदलते हैं और भारत इस खेल में मजबूती से उभरता नजर आ रहा है। गौरतलब है कि  ईरान से जुड़े युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को जोखिम में डाल दिया है। इसी को देखते हुए भारत ने तेजी से कदम उठाते हुए एक हफ्ते में करीब 30 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद लिया, ताकि घरेलू जरूरतों को पूरा किया जा सके।

  

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