Edited By Tanuja,Updated: 18 Mar, 2026 07:03 PM

Iran ने अपने South Pars Gas Field पर हमले के बाद खाड़ी देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमले की धमकी दी। सऊदी, कतर और UAE के रिफाइनरी व गैस फील्ड निशाने पर हैं। इससे वैश्विक तेल बाजार में बड़े संकट की आशंका बढ़ गई है।
International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब और खतरनाक हो गया है। Iran ने अपने गैस फील्ड पर हमले के बाद अब खुलकर Saudi Arabia, Qatar और United Arab Emirates के तेल-गैस ठिकानों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है। Iran ने बुधवार को सरकारी टीवी के जरिए एक सख्त चेतावनी जारी की। इसमें कहा गया कि अगर उसके खिलाफ हमले जारी रहते हैं, तो वह खाड़ी देशों के महत्वपूर्ण तेल और गैस ठिकानों को निशाना बना सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब ईरान ने दावा किया कि उसके सबसे बड़े गैस प्रोजेक्ट South Pars Gas Field और उससे जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ है। यह गैस फील्ड ईरान की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
हमले के बाद ईरान ने इसे सीधी उकसावे वाली कार्रवाई बताते हुए अब जवाबी रणनीति अपनाने का संकेत दिया है। सरकारी मीडिया में जारी संदेश में साफ तौर पर कहा गया कि क्षेत्र के ऊर्जा संसाधन अब “सुरक्षित नहीं” माने जाएं। ईरान ने जिन ठिकानों को निशाना बनाने की बात कही है, उनमें Saudi Arabia की Samref Refinery और Jubail Petrochemical Complex शामिल हैं। ये दोनों सऊदी अरब के सबसे बड़े औद्योगिक और तेल प्रोसेसिंग हब हैं।इसके अलावा United Arab Emirates के Al Hasan Gas Field और Qatar के पेट्रोकेमिकल प्लांट्स और रिफाइनरी को भी संभावित टारगेट बताया गया है। ये सभी ठिकाने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यह धमकी उसी स्टाइल में जारी की, जैसा Israel की सेना युद्ध के दौरान चेतावनी देने के लिए इस्तेमाल करती है।
इससे यह संकेत मिलता है कि यह सिर्फ बयान नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश भी है। अगर ईरान अपने बयान के अनुसार कार्रवाई करता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। खाड़ी देश दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस निर्यातक हैं। ऐसे में इन ठिकानों पर हमला होने से सप्लाई बाधित हो सकती है और तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं। महंगाई बढ़ सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव आ सकता है। इसके अलावा, इस घटनाक्रम से United States की भूमिका भी अहम हो सकती है, क्योंकि वह पहले से ही क्षेत्र में सैन्य रूप से सक्रिय है और अपने सहयोगी देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश करेगा।