Edited By jyoti choudhary,Updated: 07 Mar, 2026 12:10 PM

तेल कंपनियों ने रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। करीब एक साल बाद घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए का इजाफा किया गया है, जबकि
बिजनेस डेस्कः तेल कंपनियों ने रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। करीब एक साल बाद घरेलू गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए का इजाफा किया गया है, जबकि 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम 115 रुपए बढ़ गए हैं। नई कीमतें Indian Oil Corporation की वेबसाइट पर अपडेट कर दी गई हैं और ये तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं।
क्या हैं नई दरें
नई दरों के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू एलपीजी सिलेंडर 853 रुपए से बढ़कर 913 रुपए हो गया है। कोलकाता में इसकी कीमत 879 रुपए से बढ़कर 939 रुपए हो गई है, जबकि चेन्नई में यह 868.50 रुपए से बढ़कर 928.50 रुपए प्रति सिलेंडर हो गई है।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 1883 रुपए और मुंबई में 1835 रुपए हो गई है। कोलकाता में इसकी कीमत बढ़कर 1990 रुपए हो गई है, जबकि चेन्नई में यह 2043.50 रुपए तक पहुंच गई है। कमर्शियल गैस महंगी होने से होटल, रेस्टोरेंट और फूड बिजनेस पर असर पड़ सकता है।
अचानक क्यों बढ़े दाम
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। खासकर Strait of Hormuz में बाधाओं की वजह से गैस और तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। इसी मार्ग से भारत को बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधन मिलते हैं। ऐसे में अचानक से LPG के दाम में बढ़ोतरी को एहतियाती कदम के रूप में भी देखा जा रहा है, ताकि देश में पर्याप्त भंडार बना रहे और सप्लाई में कोई बड़ी समस्या न आए।
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, भारत के पास एलपीजी का सीमित भंडार बचा है। इसी वजह से सरकार ने तेल कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि आपूर्ति सुचारु बनी रहे। देश में करीब 33 करोड़ से ज्यादा सक्रिय एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिन पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर पड़ सकता है।
क्या और भी बढ़ेंगे दाम?
उधर Saad Al-Kaabi ने भी चेतावनी दी है कि यदि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं, जिससे गैस और ईंधन की कीमतों में और तेजी आने की आशंका जताई जा रही है।