बढ़ती लागत के दबाव से निपटने को प्रौद्योगिकी को अपना रहा रियल एस्टेट क्षेत्र

Edited By Updated: 07 May, 2026 05:51 PM

the real estate sector is embracing technology to cope with rising cost pressure

भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र बढ़ती लागत के दबाव और सख्त नियामकीय अनुपालन के बीच मूल्य श्रृंखला में दक्षता बढ़ाने के लिए तेजी से डिजिटल और डेटा-आधारित माध्यमों (टूल) को अपना रहा है। उद्योग मंडल फिक्की और केपीएमजी की एक संयुक्त रिपोर्ट में यह जानकारी...

नई दिल्लीः भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र बढ़ती लागत के दबाव और सख्त नियामकीय अनुपालन के बीच मूल्य श्रृंखला में दक्षता बढ़ाने के लिए तेजी से डिजिटल और डेटा-आधारित माध्यमों (टूल) को अपना रहा है। उद्योग मंडल फिक्की और केपीएमजी की एक संयुक्त रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का रियल एस्टेट बाजार 2047 तक 5,800 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा जो 2025 में 650 अरब डॉलर का था।

फिक्की और परामर्श कंपनी केपीएमजी की रिपोर्ट 'भारत के रियल एस्टेट परिदृश्य की पुनर्कल्पना - मूल्य श्रृंखला परिवर्तन में प्रौद्योगिकी की भूमिका' बृहस्पतिवार को यहां जारी की गई। फिक्की द्वारा आयोजित एक रियल एस्टेट शिखर सम्मेलन में जारी रिपोर्ट में कहा गया, ''... यह क्षेत्र अब मूल्य श्रृंखला में तेजी से डिजिटल और डेटा-आधारित माध्यमों को अपना रहा है।'' रिपोर्ट कहती है कि भारत का रियल एस्टेट क्षेत्र परियोजनाओं की योजना, निष्पादन, बिक्री और प्रबंधन के तरीके में संरचनात्मक बदलाव का अनुभव कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया, ''प्रौद्योगिकी संपूर्ण रियल एस्टेट मूल्य श्रृंखला को आधार प्रदान करने वाली एक प्रमुख परिचालन माध्यम के रूप में उभर रही है। इसमें स्थान का चुनाव, डिजाइन, निर्माण, बिक्री और परिसंपत्ति प्रबंधन शामिल हैं।'' फिक्की और केपीएमजी ने इस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की स्वीकार्यता बढ़ाने के प्रमुख कारकों को सूचीबद्ध किया है। इसमें लागत दक्षता की अनिवार्यता, बढ़ी हुई नियामकीय और अनुपालन अपेक्षाएं, संस्थागत पूंजी की बढ़ती भागीदारी और अधिक जागरूक और सक्रिय घर के खरीदार शामिल हैं। रिपोर्ट कहती है, ''ये कारक बिल्डर को मैन्युअल, प्रतिक्रियात्मक प्रक्रियाओं से हटकर सक्रिय डिजिटल समाधान की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।'' 

अन्य स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का रियल एस्टेट बाजार, जिसका मूल्य 2025 में 650 अरब अमेरिकी डॉलर था, 2047 तक 5,800 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि रीट (रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट) और इनविट (इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट) के माध्यम से 16 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि जुटाई गई है। यह दर्शाता है कि बाजार अब संस्थागत रूप से प्रबंधित, पारदर्शी मंचों की ओर निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम के दौरान, स्क्वायर यार्ड्स के सह-संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) हितेश सिंगला ने कहा कि भारतीयों के रियल एस्टेट से जुड़ने के तरीके में निर्णायक बदलाव आया है। उन्होंने कहा, ''आज के उपभोक्ता कुछ साल पहले की तुलना में कहीं अधिक जानकार, डिजिटल रूप से जागरूक हैं। संपत्ति लेनदेन को अब अलग-थलग खरीदारी के रूप में नहीं देखा जाता है। खरीदार अब खोज, वित्तपोषण, सलाहकार सेवाओं, दस्तावेजीकरण और बिक्री के बाद की सेवा तक एक सहज प्रक्रिया की अपेक्षा करते हैं।'' 
 

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