Edited By Tanuja,Updated: 07 May, 2026 03:58 PM

ईरान आज पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को युद्ध प्रस्ताव पर जवाब भेज सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तेहरान फिलहाल युद्ध खत्म करने, प्रतिबंध हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की गारंटी चाहता है। ईरान ने साफ किया है कि पहले युद्धविराम होगा, उसके बाद ही...
International Desk: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान आज अमेरिका के प्रस्ताव पर अपना जवाब पाकिस्तान के जरिए भेज सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेहरान फिलहाल किसी परमाणु समझौते से पहले युद्ध खत्म कराने, प्रतिबंध हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने की शर्तों पर जोर दे रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया की नजरें एक बार फिर ईरान-अमेरिका टकराव और पाकिस्तान की मध्यस्थता पर टिका दी हैं। ईरानी मीडिया और अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के मध्यस्थ आज ईरान के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक समयसीमा तय नहीं की गई है, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि तेहरान जल्द ही अपना रुख साफ कर सकता है।
ईरान की संसद के एक सांसद और पूर्व विदेश मंत्री ने कहा है कि अमेरिका को जवाब भेजा जाएगा, लेकिन फिलहाल ईरान की प्राथमिकता सभी मोर्चों पर युद्ध रोकना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय कोई परमाणु वार्ता नहीं हो रही है। तेहरान की मुख्य मांग यह है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीधे तौर पर गारंटी दे कि युद्ध दोबारा नहीं होगा। इसके साथ ही ईरान चाहता है कि उस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएं और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोला जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर ये मांगें पूरी होती हैं, तो दूसरे चरण में ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। यानी फिलहाल ईरान पहले सुरक्षा और आर्थिक राहत चाहता है, उसके बाद ही परमाणु मुद्दे पर आगे बढ़ना चाहता है।
इसी बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपनी पकड़ और मजबूत करने के लिए “पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी” नाम से एक नई संस्था बनाई है। ईरान ने दावा किया है कि अब इस जलमार्ग का समुद्री नियम बदल गया है और यहां से गुजरने वाले हर जहाज को पहले ईरानी अधिकारियों से संपर्क करना होगा। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तनाव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर पड़ सकता है। उधर, ईरानी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रजा तलाये-निक ने कहा कि अमेरिका और इजराइल को ईरानी जनता के अधिकारों को स्वीकार करना होगा।
उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका “जायोनी शासन” यानी इजराइल से दूरी नहीं बनाता, तो वह इस “दलदल” से बाहर नहीं निकल पाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को जमीनी हकीकत स्वीकार करनी होगी और ईरान के अधिकारों को मानना होगा, तभी युद्ध समाप्त होने का रास्ता खुलेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया है और दोनों देशों के बीच बैकचैनल बातचीत तेज हो गई है।