Edited By Niyati Bhandari,Updated: 07 May, 2026 01:05 PM

Bada Mangal 2026: साल 2026 में ज्येष्ठ मास के दौरान 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बन रहा है। जानें क्यों भीषण गर्मी और लू के बीच की जाती है हनुमान जी की पूजा और क्या है बुढ़वा मंगल का पौराणिक इतिहास।
Budhwa Mangal 2026: ज्येष्ठ का महीना श्री हनुमान भक्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। इस माह में बड़े मंगल की धूम रहती है खासतौर पर उत्तर भारत के अवध और लखनऊ में तो खास रौनक देखने को मिलती है। लखनऊ के हजरतगंज स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर, हनुमान सेतु मंदिर, अलीगंज हनुमान मंदिर, लेटे हुए पातालपुरी हनुमान मंदिर, छांछी कुंआ मंदिर आदि स्थानों पर बड़े मंगल का विशेष पूजन होता है। मान्यता है की जो व्यक्ति बुढ़वा मंगलवार के दिन हनुमान मंदिर जाकर बजरंगबली का दर्शन करता है, उसके सभी पापों का नाश होता है और सभी रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं।

बजरंगबली की कृपा दिलाने वाला ये पावन पर्व 2 मई से आरंभ हो गया है और 29 जून जेष्ठ माह की पूर्णिमा पर समाप्त होगा। 17 मई से लेकर 15 जून के बीच 'अधिक मास' पड़ने के कारण इस बार कुल 8 बड़े मंगल का दुर्लभ संयोग बनने जा रहा है।
बड़े मंगलवार की शुरुआत कैसे हुई ?
बड़े मंगलवार की शुरूआत करीब 400 साल पहले अवध के नवाब ने की थी। एक बार की बात है नवाब मोहम्मद अली शाह का बेटा गंभीर रूप से बीमार हो गया। उनकी बेगम रूबिया ने कई जगह उसका इलाज करवाया, लेकिन वह ठीक नहीं हुआ। लोगों ने उन्हें बेटे की सलामती के लिए लखनऊ के अलीगंज स्थित पुराने हनुमान मंदिर में मन्नत मांगने को कहा। यहां मन्नत मांगने पर नवाब का बेटा स्वस्थ हो गया। इसके बाद नवाब की बेगम रूबिया ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। वहीं नवाब ने ज्येष्ठ की भीषण गर्मी के दिनों में प्रत्येक मंगलवार को पूरे शहर में जगह-जगह गुड़ और पानी का वितरण करवाया और तभी से इस परंपरा की शुरुआत हुई।

आग बरसते मौसम में ही क्यों आते हैं 'बड़े मंगल'?
मई और जून की भीषण गर्मी, जब सूरज आग उगल रहा होता है और लू के थपेड़े शरीर को झुलसाने लगते हैं, उसी बीच 'बड़े मंगल' की धूम मचती है। साल 2026 में ज्येष्ठ का महीना न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार भी बेहद खास है।
ज्येष्ठ मास वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। हनुमान जी को शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जब प्रकृति अपने सबसे कठिन रूप में होती है, तब ईश्वर की भक्ति मनुष्य को मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करती है।
ज्येष्ठ मास में हुई थी श्रीराम और हनुमान की पहली मुलाकात
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार श्री हनुमान जी अपने आराध्य प्रभु श्रीराम से पहली बार ज्येष्ठ माह के मंगलवार वाले दिन ही मिले थे। यही बड़ा कारण है जो इसे बड़ा मंगल का नाम दिया गया।

हनुमान जी के भाई थे भीम
हनुमान जी पवन पुत्र हैं। कुंती ने पवन देव के माध्यम से ही भीम को जन्म दिया था। इस तरह से भीम हनुमान जी के भाई हुए। ज्येष्ठ महीने के मंगलवार को हनुमान जी ने एक वृद्ध वानर का रूप धारण कर भीम का घमंड तोड़ा था। वृद्ध रूप धारण करने के कारण ही इसे 'बुढ़वा मंगल' भी कहा जाता है।
