सरकार के फैसले को चुनौती के बाद कैम्बे ब्लॉक का नियंत्रण हस्तांतरण टला

Edited By Updated: 28 May, 2026 01:17 PM

transfer of control over cambay block deferred following challenge

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) को गुजरात के कैम्बे बेसिन के ब्लॉक सीबी-ओएस-02 का परिचालन नियंत्रण अभी तक नहीं मिल पाया है क्योंकि वेदांता ने इस ब्लॉक की अनुबंध अवधि बढ़ाने से इनकार करने के सरकार के फैसले को...

नई दिल्लीः सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) को गुजरात के कैम्बे बेसिन के ब्लॉक सीबी-ओएस-02 का परिचालन नियंत्रण अभी तक नहीं मिल पाया है क्योंकि वेदांता ने इस ब्लॉक की अनुबंध अवधि बढ़ाने से इनकार करने के सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 19 सितंबर 2025 के निर्देश के माध्यम से इस ब्लॉक के अनुबंध को बढ़ाने से इनकार कर दिया था। इस ब्लॉक में ओएनजीसी की 50 प्रतिशत, वेदांता की 40 प्रतिशत और इनवेनीर पेट्रोडाइन लिमिटेड की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी है। 

सरकार के इस फैसले के बाद ओएनजीसी ने कहा कि उसे तुरंत ब्लॉक का संचालन संभालने का निर्देश दिया गया और उसने 20 सितंबर 2025 से गुजरात के सुवाली में अपना परिचालन दल तैनात कर दिया था। हालांकि, कंपनी ने कहा कि वेदांता ने अब तक संचालन का हस्तांतरण नहीं किया है। ओएनजीसी ने अपने वित्त वर्ष 2025-26 के परिणामों की जानकारी देते हुए कहा, ''भारत सरकार के निर्देश के अनुपालन में ओएनजीसी ने वेदांता से तत्काल संचालन हस्तांतरण का अनुरोध किया और 20 सितंबर 2025 से सुवाली (गुजरात) में अपने दल को तैनात कर दिया। हालांकि, वेदांता ने अभी तक संचालन नहीं सौंपा है।'' 

ओएनजीसी के अनुसार, वेदांता ने 22 सितंबर 2025 को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अनुबंध अवधि बढ़ाने से इनकार किए जाने के फैसले को चुनौती दी। कंपनी ने कहा, " अदालत ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने को कहा और मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। 18 मई 2026 को सभी सुनवाई पूरी हो गई थीं और अदालत ने आदेश सुरक्षित रख लिया है।'' ओएनजीसी ने कहा, ''कार्यवाही के परिणाम आने तक वेदांता ही ब्लॉक का परिचालक बना हुआ है। कंपनी भारत सरकार के निर्देश मिलने पर संचालन संभालने के लिए तैयार है।'' 

वेदांता के प्रवक्ता ने कहा, ''अदालत ने पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए इससे अधिक टिप्पणी नहीं की जा सकती।'' पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 19 सितंबर 2025 के पत्र में भागीदारों को सूचित किया था कि उत्पादन साझेदारी अनुबंध (पीएससी) को बढ़ाने का आवेदन स्वीकार नहीं किया गया है। हालांकि, इस फैसले के कारणों का उल्लेख नहीं किया गया लेकिन ओएनजीसी को अंतरिम अवधि में संचालन संभालने के लिए कहा गया। पीएससी सरकार और संसाधन निष्कर्षण करने वाली कंपनी के बीच एक समझौता होता है। इसके तहत कंपनी को निश्चित अवधि के लिए संसाधनों की खोज, विकास एवं उत्पादन का अधिकार मिलता है और लागत वसूली के बाद उत्पादित संसाधनों में से तय हिस्सेदारी सरकार को दी जाती है। 

सीबी-ओएस-02 ब्लॉक में लक्ष्मी और गौरी क्षेत्र शामिल हैं, जहां प्रतिदिन लगभग 3,400 बैरल तेल और 3.4 लाख मानक घन मीटर गैस का उत्पादन होता है। यह उन तीन संपत्तियों में से एक था, जिन्हें 2011 में उद्योगपति अनिल अग्रवाल के समूह ने 8.67 अरब अमेरिकी डॉलर में केयरन इंडिया के अधिग्रहण के समय हासिल किया था। केयरन इंडिया की अन्य संपत्तियों में राजस्थान के बाड़मेर तेल क्षेत्र और आंध्र प्रदेश तट के कृष्णा-गोदावरी बेसिन में स्थित राववा तेल एवं गैस क्षेत्र शामिल थे। केयरन इंडिया का 2017 में वेदांता लिमिटेड में विलय कर दिया गया। 
 

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