बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल भरवाना हो सकता है मुश्किल, बड़ा कदम उठाने की तैयारी में सरकार

Edited By Updated: 18 Sep, 2026 05:39 PM

refueling an uninsured vehicle with petrol or diesel may become difficult

अगर आप कार, बाइक या कोई अन्य वाहन चलाते हैं तो मोटर इंश्योरेंस से जुड़ा यह अपडेट आपके लिए बेहद अहम है। अगर आपकी गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खत्म हो चुका है तो आने वाले दिनों में आपको पेट्रोल-डीजल भरवाने में परेशानी हो सकती है। दरअसल,

नई दिल्लीः अगर आप कार, बाइक या कोई अन्य वाहन चलाते हैं तो मोटर इंश्योरेंस से जुड़ा यह अपडेट आपके लिए बेहद अहम है। अगर आपकी गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस खत्म हो चुका है तो आने वाले दिनों में आपको पेट्रोल-डीजल भरवाने में परेशानी हो सकती है। दरअसल, बीमा नियामक IRDAI एक ऐसे सिस्टम पर काम कर रहा है, जिसमें पेट्रोल पंप पर पेट्रोल-डीजल भरने से पहले नंबर प्लेट स्कैन करके उसके बीमा की स्थिति जांची जा सकेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) तकनीक का इस्तेमाल किए जाने की योजना है। यदि गाड़ी का बीमा एक्सपायर मिलेगा तो फ्यूल पंप ऑपरेटर को ईंधन देने से रोकने का अधिकार होगा। 

कैसे काम करेगा सिस्टम?

प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के तहत पेट्रोल पंप पर पहुंचने वाले वाहनों की नंबर प्लेट ANPR कैमरे से स्कैन की जा सकती है। इसके बाद वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर को बीमा से जुड़े रिकॉर्ड से मिलाकर यह पता लगाया जाएगा कि उसके पास वैध थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस है या नहीं।

इस प्रक्रिया में बीमा सूचना ब्यूरो (IIB) और VAHAN के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जा सकता है। फिलहाल इस व्यवस्था को चुनिंदा शहरों में पायलट आधार पर लागू करने की तैयारी की जा रही है।

बिना इंश्योरेंस के वाहन को नहीं मिलेगा ईंधन

अगर यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है और सिस्टम बड़े स्तर पर लागू होती है, तो फ्यूचर में पेट्रोल पंप पर ईंधन भरने से पहले गाड़ी का बीमा स्टेटस जांचने की व्यवस्था की जा सकती है। वैध थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस नहीं होने पर पेट्रोल या डीजल देने से इनकार करने का प्रवधान भी लाया जा सकता है। इससे खासतौर पर अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस की मांग बढ़ने की उम्मीद है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद शुरू हुई तैयारी

यह पहल सुप्रीम कोर्ट के 4 अगस्त के फैसले से जुड़ी है। कोर्ट ने IRDAI को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ मिलकर ऐसी पायलट परियोजना तैयार करने को कहा था, जिसमें वाहन के वैध बीमा और ईंधन की सप्लाई के बीच संबंध की संभावना को जांचा जा सके। हालांकि, इस पायलट प्रोजेक्ट का एक खास मकसद बिना बीमा वाले गाड़ियों की पहचान करना और वाहन मालिकों को जरूरी थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेने के लिए प्रेरित करना भी है।

56% गाड़ियों के पास बीमा नहीं

सुप्रिम कोर्ट में सड़क सुरक्षा और बीमा अनुपालन से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। कोर्ट को जब पता चला कि भारत की सड़कों पर चल रहे कुल वाहनों में से लगभग 56 प्रतिशत गाड़ियों के पास वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस ही नहीं है तो अदालत ने इस पर गहरी हैरानी और नाराजगी जताई। 

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