मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिफाइनिंग के साथ हरित ऊर्जा पर जोर, रिटेल और डिजिटल सेवाओं तक बढ़ा कारोबार

Edited By Updated: 15 Oct, 2026 05:16 PM

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गुजरात का जामनगर तेल शोधन के साथ अब नई ऊर्जा के क्षेत्र में भी रिलायंस की विस्तार योजनाओं का प्रमुख केंद्र बन रहा है। दुनिया के सबसे बड़े एक ही स्थान पर स्थित रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के लिए पहचान रखने वाले जामनगर में धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा...

जामनगरः गुजरात का जामनगर तेल शोधन के साथ अब नई ऊर्जा के क्षेत्र में भी रिलायंस की विस्तार योजनाओं का प्रमुख केंद्र बन रहा है। दुनिया के सबसे बड़े एक ही स्थान पर स्थित रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स के लिए पहचान रखने वाले जामनगर में धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स के जरिए सौर ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े कारोबार को आगे बढ़ाया जा रहा है।

धीरूभाई अंबानी द्वारा स्थापित औद्योगिक आधार को मुकेश अंबानी ने पेट्रोलियम, रिटेल, दूरसंचार और डिजिटल सेवाओं तक विस्तार दिया। वर्ष 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद समूह की विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बड़े पैमाने पर निवेश और भविष्य की मांग के अनुरूप कारोबार विकसित करने की नीति अपनाई।

जामनगर इस विस्तार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर विभिन्न देशों के बाजारों के लिए पेट्रोलियम उत्पाद तैयार किए जाते हैं। रिफाइनिंग कारोबार के विकास के साथ क्षेत्र में आपूर्तिकर्ताओं, सेवा प्रदाताओं और कुशल श्रमिकों का नेटवर्क भी विकसित हुआ। इससे गुजरात में निवेश, रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।

अब इसी औद्योगिक आधार के साथ हरित ऊर्जा के क्षेत्र में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। धीरूभाई अंबानी ग्रीन एनर्जी गीगा कॉम्प्लेक्स रिलायंस के ऊर्जा कारोबार को नई दिशा देने की योजना का हिस्सा है। तेल आधारित कारोबार के साथ सौर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्रों में विस्तार जामनगर की औद्योगिक भूमिका को और व्यापक बना रहा है।

रिलायंस का विस्तार ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। नरोदा की कपड़ा मिल से भारतीय परिवारों तक पहुंच बनाने वाला समूह रिटेल, मीडिया, मनोरंजन और दूरसंचार के जरिए उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतों से भी जुड़ा। रिलायंस रिटेल ने बड़े शहरों के साथ छोटे कस्बों तक अपनी पहुंच बढ़ाई, जबकि डिजिटल और दूरसंचार सेवाओं ने समूह के कारोबार को नया आयाम दिया।

इस कारोबारी सफर में आम निवेशकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण रही। वर्ष 1977 में रिलायंस के सार्वजनिक निर्गम से शुरू हुआ शेयरधारकों का जुड़ाव आगे भी बना रहा। वर्ष 2006 में रिलायंस पेट्रोलियम के सार्वजनिक निर्गम ने निवेशकों को समूह के रिफाइनिंग कारोबार में हिस्सेदारी का अवसर दिया। वर्ष 2009 में रिलायंस पेट्रोलियम का रिलायंस इंडस्ट्रीज में विलय हो गया।

जामनगर में तेल शोधन से लेकर नई ऊर्जा तक का विस्तार रिलायंस के बदलते कारोबारी स्वरूप को दर्शाता है। इस सफर में गुजरात की औद्योगिक संरचना, समुद्री तट, श्रमिकों और स्थानीय कारोबारी नेटवर्क की भी अहम भूमिका रही है।

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