Edited By Niyati Bhandari,Updated: 20 Apr, 2026 07:25 AM

Aaj ka Panchang 20th april 2026, 20 अप्रैल 2026 का पंचांग: हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार विक्रम संवत 2083 वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। 20 अप्रैल 2026, सोमवार का दिन है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि होने के कारण आज का दिन नए...
Aaj ka Panchang 20th april 2026, 20 अप्रैल 2026 का पंचांग: हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार विक्रम संवत 2083 वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। 20 अप्रैल 2026, सोमवार का दिन है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि होने के कारण आज का दिन नए कार्यों के आरंभ और मंगल काम करने के लिए बहुत शुभ है।

शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:54 AM से 12:46 PM का समय सबसे श्रेष्ठ है। इस दौरान कोई भी मंगलमय कार्य किया जा सकता है।
राहुकाल: सुबह 07:28 AM से 09:05 AM तक राहुकाल रहेगा। पुराणों में कहा गया है, जब राहुकाल चल रहा हो तो कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।
दिशाशूल: पूर्व दिशा की यात्रा को टालें।
दिनचर्या और सूर्योदय
इस दिन सूर्य उदय सुबह 05:51 AM पर होगा और सूर्यास्त शाम 06:50 PM पर होगा।
चंद्रमा और नक्षत्रों का अद्भुत मेल
इस दिन चंद्रमा वृषभ राशि में रहेंगे और सूर्य मेष राशि में विराजमान होंगे। पंचांग के अनुसार, इस दिन रोहिणी नक्षत्र है। रोहिणी को विकास और सृजन का नक्षत्र माना जाता है। साथ ही, इस दिन सौभाग्य योग बन रहा है, जो जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, हमारे कार्यों में सफलता और सौभाग्य लेकर आता है।
आज का विशेष पर्व और त्यौहार: मातंगी जयंती और संकर्षण चतुर्थी

मातंगी जयंती- ग्रंथों के अनुसार देवी मातंगी दसमहाविद्या में से नवीं महाविद्या हैं। ये वाणी और संगीत की अधिष्ठात्री देवी कहलाती हैं। इसके साथ ही इन्हें स्तम्भन की देवी कहा जाता है। माना जाता कि देवी मातंगी दांपत्य जीवन को सुखी और समृद्ध बनाने वाली होती हैं इनका पूजन करने से गृहस्थ के सभी सुख प्राप्त होते हैं। भगवती मातंगी अपने भक्तों को अभय का फल प्रदान करती हैं। यह अभीष्ट सिद्धि प्रदान करती हैं।
संकर्षण विनायक चतुर्थी- आज का दिन संकर्षण विनायक चतुर्थी के रूप में भी मनाया जाएगा। धार्मिक दृष्टि से इस दिन पूजा और व्रत करना बहुत महत्वपूर्ण है। संकटो से मुक्ति के लिए गणपती पर 11 दूर्वा चढ़ाएं। घर की पूर्व दिशा में पूर्वमुखी होकर लाल कपड़े पर गणेश जी का चित्र स्थापित कर षोडशोपचार पूजन करें। गौघृत में सिंदूर मिलाकर दीपक करें, गुगल से धूप करें, गैंदे का फूल चढ़ाएं, सिंदूर चढ़ाएं, गुड़ का भोग लगाएं।
