Edited By Niyati Bhandari,Updated: 04 Jun, 2026 10:23 AM

Jagannath Rath Yatra 2026: जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 की शुरुआत 16 जुलाई से होने जा रही है। जानें पुरी रथ यात्रा का महत्व, तीनों रथों की विशेषताएं और बहुदा यात्रा की तारीख।
Jagannath Rath Yatra 2026: सनातन धर्म में जगन्नाथ पुरी धाम का विशेष महत्व है, जो चार धामों में से एक माना जाता है। हर साल की तरह, साल 2026 में भी भगवान जगन्नाथ, अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलेंगे। इस विश्व प्रसिद्ध 'रथ यात्रा' की तैयारियां अभी से चर्चा में हैं। आस्था और भक्ति का यह अनूठा उत्सव न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र होता है।

Jagannath Rath Yatra 2026: नोट कर लें तारीख
साल 2026 में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा 16 जुलाई, गुरुवार से शुरू होगी। यह यात्रा पुरी स्थित मुख्य मंदिर से शुरू होकर गुंडीचा मंदिर (भगवान की मौसी का घर) तक जाती है। लगभग 9 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का समापन 24 जुलाई 2026 को 'बहुदा यात्रा' यानी वापसी यात्रा के साथ होगा।

बाहुड़ा यात्रा क्या है?
'बाहुड़ा' शब्द ओड़िया भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ 'वापसी' होता है। इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने विशाल रथों पर गुंडिचा मंदिर से वापस अपने मुख्य मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं। यह यात्रा भी रथ यात्रा की तरह ही भव्य और उत्साहपूर्ण होती है, बस इसकी दिशा विपरीत होती है। भगवान बलभद्र का रथ 'तालध्वज', देवी सुभद्रा का रथ 'दर्पदलन'और भगवान जगन्नाथ का रथ 'नंदीघोष' हैं।
रथ यात्रा का आध्यात्मिक महत्व
भारतीय जनमानस की भक्ति के प्राणाधार श्री कृष्ण का सबसे दयालु स्वरूप भगवान जगन्नाथ है। भगवान जगन्नाथ अर्थात भक्त के नाथ, जगत के नाथ दयालु भगवान। इस स्वरूप में विशाल नेत्रों के साथ बांहें पसारे भगवान जगन्नाथ भक्त को अपने आलिंगन में लेने के लिए उसे पुकार रहे हैं। भगवान जगन्नाथ रथयात्राओं के आयोजन का वास्तविक अर्थ भक्त एवं भगवान का मिलन है।
तीनों रथों की अनोखी विशेषताएं
रथ यात्रा के लिए भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और जगन्नाथ जी के रथ अलग-अलग होते हैं, जिनका निर्माण धार्मिक विधि से अक्षय तृतीया के दिन से आरंभ होता है। वर्तमान समय में अभी इनका निर्माण चल रहा है।
नंदी घोष: भगवान जगन्नाथ का रथ नंदी घोष 45 फीट ऊंचा होता है, जिसमें 16 पहिये होते हैं। इसका रंग लाल और पीला होता है। इस रथ के रक्षक के रुप में महावीर बजरंगबली और भगवान नृसिंह के प्रतीक अंकित किए जाने का विधान है। रथ यात्रा में जगन्नाथ जी का रथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के पीछे रहता है।
तालध्वज: जगन्नाथ जी के बड़े भाई बलभद्र का रथ है तालध्वज। जो रथ यात्रा का नेतृत्व करते हुए सबसे आगे रहता है। इसकी ऊंचाई 44 फीट रहती है, जिसमें 14 पहिये होते हैं। इसे पूर्ण रुप से नीले रंग से सजाया जाता है।
दर्पदलन: बहन सुभद्रा जी का रथ दोनों भाईयों के मध्य में चलता है। इसकी ऊंचाई 43 फीट है और इसमें 12 पहिये होते हैं
बलभद्र जी का रथ (तालध्वज): भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई बलभद्र जी का रथ सबसे आगे रहता है। इसकी ऊंचाई 44 फीट है और इसमें 14 पहिये होते हैं। यह नीले रंग की सजावट के साथ अपनी भव्यता बिखेरता है। ये रथ काले रंग से सुसज्जित होता है।
