Amarnath Yatra 2025: पवित्र गुफा में छड़ी पूजन के साथ अमरनाथ यात्रा सम्पन्न

Edited By Updated: 10 Aug, 2025 09:30 AM

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पवित्र अमरनाथ धाम में श्रावण पूर्णिमा पर भगवान शिव एवं पार्वती के स्वरूप दोनों छड़ियों का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया गया। शनिवार सुबह पंचतरणी से पवित्र छड़ी मुबारक अमरनाथ धाम के लिए रवाना हुई और जिस स्थान पर बर्फानी बाबा बिराजमान होते हैं,...

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श्रीनगर/जम्मू (उदय): पवित्र अमरनाथ धाम में श्रावण पूर्णिमा पर भगवान शिव एवं पार्वती के स्वरूप दोनों छड़ियों का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया गया। शनिवार सुबह पंचतरणी से पवित्र छड़ी मुबारक अमरनाथ धाम के लिए रवाना हुई और जिस स्थान पर बर्फानी बाबा बिराजमान होते हैं, वहां इन पवित्र छड़ियों के पूजन के साथ ही 3 जुलाई को शुरू हुई वार्षिक अमरनाथ यात्रा सम्पन्न हो गई।

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद क्यास लगाए जा रहे थे कि इस हमले का यात्रा पर असर पड़ेगा परन्तु इसके बावजूद देश के कोने-कोने से आए 4.15 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अमरनाथ गुफा में माथा टेक बाबा बर्फानी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

श्रीनगर के अमरेश्वर मंदिर (दशनामी अखाड़ा) से भगवान शिव एवं शक्ति की प्रतीक दोनों छड़ियों को लेकर संरक्षक महंत दीपेन्द्र गिरि अमरनाथ धाम के लिए नागपंचमी पर रवाना हुए। शुक्रवार को पंचतरणी में छड़ी मुबारक के विश्राम लेने के बाद शनिवार सुबह बर्फानी बाबा के जयघोष के साथ साधु-संत यात्रा के लिए रवाना हुए और पवित्र अमरनाथ गुफा में छड़ी मुबारक पहुंची।

अमरनाथ गुफा की सुरक्षा में तैनात सुरक्षाबलों के जवानों एवं अधिकारियों ने छड़ी मुबारक लेकर आए साधु- संतों का स्वागत किया। जिस स्थान पर बर्फानी बाबा हिम शिवलिंग के रूप में बिराजमान होते हैं वहां इन दोनों छड़ियों को स्थापित कर वैदिक मंत्रोचारण के साथ पूजा-अर्चना की गई। इसके साथ ही वार्षिक अमरनाथ यात्रा धार्मिक अनुष्ठान के साथ सम्पन्न हो गई।

मौसम खराब होने एवं बारिश के चलते 3 अगस्त से दोनों मार्गों की रिपेयर को लेकर अनिश्चितकाल के लिए यात्रा को स्थगित कर दिया गया था। लगातार मौसम खराब रहने के कारण बाद में यात्रा में तैनात अधिकारियों को भी रिलीव कर दिया गया। श्रावण पूर्णिमा पर अमरनाथ गुफा में पवित्र छड़ियों के पूजन के बाद उन्हें वापस पहलगाम लाया जाएगा। लिद्दर दरिया के किनारे इनके वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन के बाद वापस श्रीनगर स्थित अमरेश्वर मंदिर में दोनों छड़ियों को स्थापित कर दिया जाएगा।

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