Edited By Sarita Thapa,Updated: 25 Sep, 2026 04:25 PM

सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन इसलिए भी बहुत खास होता है क्योंकि इसी दिन पितृ पक्ष की शुरुत होती है और सत्यनारायण भगवान की पूजा के...
Bhadrapada Purnima Upay : सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष में आने वाली पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन इसलिए भी बहुत खास होता है क्योंकि इसी दिन पितृ पक्ष की शुरुत होती है और सत्यनारायण भगवान की पूजा के साथ-साथ मां लक्ष्मी की उपासना का भी सबसे उत्तम संयोग बनता है। शास्त्रों के अनुसार, भाद्रपद पूर्णिमा के दिन किए गए दान, स्नान और धार्मिक उपायों का फल कई गुना होकर मिलता है। अगर आपके घर में भी बेवजहके क्लेश रहते हैं, पैसों की तंगी बनी रहती है या काम में बरकत नहीं होती है, तो इस पावन तिथि पर कुछ उपाय करने से आपकी सारी परेशानियां दूर हो सकती हैं। तो आइए जानते हैं कि भाद्रपद पूर्णिमा के दिन कौन-से 3 काम जरूर करने चाहिए।
सत्यनारायण भगवान की कथा और खीर का भोग
भाद्रपद पूर्णिमा के दिन भगवान श्री हरि विष्णु के सत्यनारायण रूप की पूजा करने का विधान है। सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर को साफ करें और भगवान सत्यनारायण का ध्यान करते हुए कथा का पाठ करें या सुनें। शाम के समय गाय के दूध से चावल की खीर बनाएं और उसमें तुलसी का पत्ता डालकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को भोग लगाएं। माना जाता है कि पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। मीठे भोग से प्रसन्न होकर वे घर में स्थायी वास करती हैं, जिससे धन-धान्य और मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

चंद्रमा को दूध मिश्रित जल का अर्घ्य देना
पूर्णिमा की रात चंद्र देव अपने पूर्ण आकार में होते हैं और उनसे सकारात्मक ऊर्जा की किरणें निकलती हैं। चंद्र देव को मन और शीतलता का कारक माना गया है। रात के समय एक तांबे या चांदी के लोटे में शुद्ध जल लें, उसमें थोड़ा-सा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाएं। इसके बाद चंद्र देव को देखते हुए "ॐ सोमाय नमः" मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें। यदि आपके घर में सदस्यों के बीच मानसिक तनाव, गुस्सा या आपसी मनमुटाव रहता है, तो चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन को शांति मिलती है और परिवार में प्रेम तथा सुख-सौहार्द बढ़ता है।

मुख्य द्वार पर गंगाजल का छिड़काव और दान-पुण्य
भाद्रपद पूर्णिमा से ही पितृ पक्ष की शुरुआत होती है, इसलिए इस दिन घर की नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालना बहुत जरूरी माना जाता है। पूर्णिमा के दिन सुबह घर के मुख्य द्वार को अच्छे से साफ करें। इसके बाद पानी में थोड़ा-सा गंगाजल और हल्दी मिलाकर मुख्य द्वार पर छिड़कें। इसके साथ ही इस दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति या ब्राह्मण को कद्दू, तिल, वस्त्र, अन्न या गुड़ का दान करें। मुख्य द्वार पर हल्दी और गंगाजल का छिड़काव करने से नकारात्मक शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पातीं। वहीं, दान करने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

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