Edited By Sarita Thapa,Updated: 23 Aug, 2026 09:42 AM

हिंदू पंचांग के अनुसार, जब भी एकदाशी तिथि का पारण और सावन सोमवार का व्रत एक साथ पड़ जाते हैं, तो कई साधक असमंजस में पड़ जाते हैं। इस बार सावन का आखिरी सोमवार और इसी दिन कई पंचांगों में श्रावण शुक्ल एकादशी के व्रत का पारण भी बताया गया है।
Ekadashi Parana and Monday Fast Same Day Rules : हिंदू पंचांग के अनुसार, जब भी एकदाशी तिथि का पारण और सावन सोमवार का व्रत एक साथ पड़ जाते हैं, तो कई साधक असमंजस में पड़ जाते हैं। इस बार सावन का आखिरी सोमवार और इसी दिन कई पंचांगों में श्रावण शुक्ल एकादशी के व्रत का पारण भी बताया गया है। हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का पारण करना बहुत जरूरी होता है, जबकि सोमवार का व्रत रखने वाले सारे लोगों को पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर देवों के देव महादेव की पूजा करते हैं। 24 अगस्त, 2026 को सावन सोमवार और एकादशी के पारण की तिथि का योग एक साथ बन रहा है। शास्त्रों के अनुसार, आप एक ही दिन दोनों व्रतों के संकल्प और नियमों का पालन बहुत सरलता के साथ करते हैं। तो आइए जानते हैं एकादशी पारण और सोमवार व्रत का एक साथ पालन कैसे करें।
एकादशी पारण और सोमवार व्रत का एक साथ पालन कैसे करें?
शास्त्रों के अनुसार, यदि एकादशी का पारण सोमवार के व्रत के दिन पड़ रहा है, तो एकादशी का व्रत जय या फलाहार लेकर खोला जा सकता है, न कि अन्न ग्रहण करके।
24 अगस्त की सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। उसके बाद सबसे पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें, फिर शिव जी और माता पार्वती की पूरे विधि-विधान से पूजा करें।
एकादशी व्रत का पारण निश्चित शुभ मुहूर्त के भीतर ही करना चाहिए। चूंकि उसी दिन सोमवार का व्रत भी है, इसलिए पारण में अन्न का सेवन न करें। इसके स्थान पर भगवान विष्णु को अर्पित किया गया चरणामृत, तुलसी दल, गंगाजल या फलाहार ग्रहण करके एकादशी व्रत का पारण संपन्न करें। इससे एकादशी का व्रत भी पूर्ण माना जाएगा और आपका सोमवार का व्रत भी खंडित नहीं होगा।
एकादशी पारण का जल या प्रसाद ग्रहण करके के बाद अपने सोमवार के व्रत को जारी रखें। पूरे दिन सात्विक रहें और शाम को शिव जी की आरती के बाद सोमवारी व्रत का फलाहार ग्रहण करें।
व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य 4 मुख्य नियम
एकादशी पारणके नाम पर इस दिन अन्न ग्रहण न करें। ऐसा करने से सोमवार का व्रत भंग हो सकता है।
एकादशी व्रत का पारण हमेशा सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने से पहले करना चाहिए।
तुलसी का पत्ता चबाने के बजाय निगला चाहिए। भगवान विष्णु के प्रसाद के रूप में तुलसी जल से पारण करना बहुत शुभ माना जाता है।
पारण से पूर्व किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को कच्चे अन्न, फल या दक्षिणा का दान अवश्य करें।
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