प्याज की कीमतें 59% बढ़ीं तो सरकार ने चला दी 'कांदा एक्सप्रेस', जानें लोगों पर क्या पड़ेगा इसका असर

Edited By Updated: 25 Aug, 2026 12:47 AM

the government launched the  kanda express  after onion prices rose 59

प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों में मौसमी तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नासिक से बड़े खपत वाले केंद्रों तक खास रेलवे रैक 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिये प्याज का भारी स्टॉक पहुंचाना शुरू कर दिया है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे...

नई दिल्लीः प्याज की आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों में मौसमी तेजी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र के नासिक से बड़े खपत वाले केंद्रों तक खास रेलवे रैक 'कांदा एक्सप्रेस' के जरिये प्याज का भारी स्टॉक पहुंचाना शुरू कर दिया है। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेलवे के इन रैक पर अभी जो स्टॉक चढ़ाया जा रहा है, उसके बुधवार तक पहचाने गए केंद्रों पर पहुंचने की उम्मीद है।

मंत्रालय के आंकड़ों से पता चलता है कि 24 अगस्त को प्याज की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत सालाना आधार पर 59 प्रतिशत बढ़कर 43.53 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो एक साल पहले 27.37 रुपये प्रति किलोग्राम थी। औसत थोक कीमत 68 प्रतिशत बढ़कर 35.58 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 21.23 रुपये प्रति किलोग्राम थी।

प्रमुख शहरों में, सोमवार को प्याज की खुदरा कीमत चेन्नई में 60 रुपये प्रति किलोग्राम (एक साल पहले 33 रुपये), दिल्ली में 55 रुपये प्रति किलोग्राम (एक साल पहले 35 रुपये) और कोलकाता में 53 रुपये प्रति किलोग्राम थी। खरे ने पीटीआई-भाषा को बताया, ''शुरुआत में, प्याज की आपूर्ति पांच प्रमुख खपत केंद्रों - चेन्नई, मदुरै, दिल्ली, एर्नाकुलम और गुवाहाटी - में की जाएगी और बाद में बाजार की जरूरतों के आधार पर और जगहों को इसमें शामिल किया जाएगा।''

नासिक में रखे गए प्याज के बफर स्टॉक को रेल रैक के जरिये बड़ी मात्रा में भेजा जा रहा है और इन चुनिंदा खपत केंद्रों में थोक और खुदरा दोनों बाजारों में आपूर्ति उतारी जाएगी। उन्होंने कहा कि एनसीसीएफ और नाफेड जैसी एजेंसियों के जरिये खुदरा बाजार में प्याज 35 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बेचा जाएगा। खरे ने कहा कि सरकार आगे कदम उठाने के लिए कीमतों पर कड़ी नजर रख रही है। उन्होंने कहा, ''नासिक में मंडी की कीमतें दिल्ली से अधिक हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। इसका मतलब है कि गुटबाजी और सट्टेबाजी चल रही है।''

प्याज का बफर स्टॉक केंद्र सरकार का एक रणनीतिक भंडार है, जिसे मुख्य रूप से आपूर्ति कम होने पर कीमतों में अचानक उछाल से बाजार को बचाने के लिए बनाया गया है। इसे मुख्य रूप से 'मूल्य स्थिरीकरण कोष' (कीमतों में स्थिरता लाने वाला कोष) के तहत नाफेड और एनसीसीएफ (उपभोक्ता सहकारी समितियों के शीर्ष संगठन) जैसी एजेंसियों के ज़रिये खरीदा जाता है और मौसमी कमी या कीमतों में तेजी के समय बाजार में नियंत्रित तरीके से जारी किया जाता है। खरे ने कहा कि सरकार के पास चालू वर्ष के लिए 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है, जो मांग को पूरा करने के लिए काफी है। खरे ने कहा कि आने वाले महीनों में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्याज की उपलब्धता संतोषजनक बनी रहेगी।

त्योहारी मांग, मौसम से जुड़ी रुकावटों, आपूर्ति-श्रृंखला की गतिविधियों और मांग की बदलती पद्धति के कारण अगस्त-सितंबर से प्याज की कीमतों में आम तौर पर मौसमी उछाल देखा जाता है। इससे निपटने के लिए, मंत्रालय बफर स्टॉक को ''बड़ी मंडियों में भेजने और खपत वाले केंद्रों में लक्षित खुदरा बिक्री'' के ज़रिये नियंत्रित तरीके से जारी करता है। मंत्रालय का कहना है कि हाल के वर्षों में इस रणनीति का लगातार पालन किया गया है।

स्टॉक जारी करने का समय, मात्रा और जगह का फैसला राज्यों में कीमतों और बाजार की स्थितियों की लगातार निगरानी के आधार पर किया जाता है। 'कांदा एक्सप्रेस' पहल, जिसका मकसद बड़े पैमाने पर प्याज की ढुलाई के लिए 'लॉजिस्टिक' की क्षमता को बेहतर बनाना था, वर्ष 2024-25 में शुरू की गई थी और तब से इसे काफी बढ़ाया गया है। साल 2024-25 में, लगभग 12,000 टन प्याज का बफर स्टॉक लेकर 14 रेल रैक पांच शहरों में भेजे गए थे। साल 2025-26 में, यह संख्या बढ़कर 86 रैक हो गई है, जिनसे देश भर के 16 बड़े शहरों में लगभग 88,000 टन प्याज पहुंचाया गया। 

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