धार्मिक आयोजनों के बजट का मामूली हिस्सा भी मिलता तो बच जाते 125 मराठी स्कूल: सुप्रीम कोर्ट के जज का बड़ा बयान

Edited By Updated: 25 Aug, 2026 12:31 AM

if we had received even a small part of the budget for religious events

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने महाराष्ट्र में प्राथमिक शिक्षा की बिगड़ती स्थिति और बंद हो रहे मराठी माध्यम के स्कूलों पर गहरी चिंता जताई है।

धुले: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले ने महाराष्ट्र में प्राथमिक शिक्षा की बिगड़ती स्थिति और बंद हो रहे मराठी माध्यम के स्कूलों पर गहरी चिंता जताई है। महाराष्ट्र के धुले जिले में एक हाई स्कूल के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने सरकारी प्राथमिकताओं पर सीधे सवाल खड़े किए। जस्टिस वराले ने कहा कि अगर सरकार धार्मिक आयोजनों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर होने वाले भारी-भरकम खर्च का एक मामूली हिस्सा भी शिक्षा पर लगाती, तो राज्य भर में लगभग 100 से 125 मराठी स्कूलों को बंद होने से बचाया जा सकता था।

धार्मिक आयोजनों और कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स के बजट पर उठाए सवाल
जस्टिस वराले ने बजट आवंटन के आंकड़ों को सामने रखते हुए बताया कि सरकार नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले के लिए 32,000 से 34,000 करोड़ रुपये और विभिन्न कॉरिडोर प्रोजेक्ट्स के लिए 11,000 करोड़ रुपये आवंटित करती है। उन्होंने कहा कि यदि इस विशाल राशि का मात्र 0.01 प्रतिशत हिस्सा (यानी लगभग 32 करोड़ रुपये) भी मराठी माध्यम के स्कूलों पर खर्च किया गया होता, तो फंड की कमी के कारण बंद हो चुके 100 से 125 स्कूलों का अस्तित्व आज बचाया जा सकता था।

'क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करियर में बाधा नहीं, दृष्टिकोण करती है व्यापक'
अपने व्यक्तिगत जीवन का अनुभव साझा करते हुए जस्टिस वराले ने बताया कि उन्होंने खुद कक्षा 10वीं तक की अपनी शिक्षा म्युनिसिपल और जिला परिषद के मराठी स्कूलों से ही प्राप्त की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाई करने से उनके करियर में कभी कोई बाधा नहीं आई, बल्कि इसने उनके दृष्टिकोण को और अधिक व्यापक व समृद्ध बनाने का काम किया।

विद्यार्थी बढ़े पर घट गया शिक्षा का बजट, बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी
जस्टिस वराले ने इस बात पर गहरी निराशा और चिंता व्यक्त की कि राज्य में विद्यार्थियों की संख्या तो लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा का बजट लगातार घट रहा है। कम बजट आवंटन के कारण राज्य में शिक्षा का बजट कई सालों से 13 प्रतिशत के स्तर तक भी नहीं पहुंच पाया है।

स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की दयनीय स्थिति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने एक अत्यंत दुखद घटना का उल्लेख किया, जहां पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में जमीन पर सोने को मजबूर तीन छात्राओं की सांप के काटने से मौत हो गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षा और स्कूलों की बुनियादी व्यवस्थाओं पर पूरा ध्यान देना बेहद आवश्यक है।

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!