Indian Constitution Day : आखिर क्यों सबसे लंबा है भारत का संविधान ? जानिए ऐतिहासिक कारण

Edited By Updated: 25 Jan, 2026 03:31 PM

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Indian Constitution Day : भारत का संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की आत्मा और पहचान है। यह हमें बताता है कि भारत कैसे चलेगा, नागरिकों के अधिकार क्या होंगे और सरकार की जिम्मेदारियां क्या हैं ? भारतीय संविधान अपनी विशालता,...

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Indian Constitution Day : भारत का संविधान केवल कानूनों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह हमारे देश की आत्मा और पहचान है। यह हमें बताता है कि भारत कैसे चलेगा, नागरिकों के अधिकार क्या होंगे और सरकार की जिम्मेदारियां क्या हैं ? भारतीय संविधान अपनी विशालता, गहराई और लोकतांत्रिक मूल्यों के कारण पूरे विश्व में विशेष स्थान रखता है। आइए, भारतीय संविधान से जुड़े कुछ रोचक और ज्ञानवर्धक तथ्यों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

संविधान सभा
भारतीय संविधान को तैयार करने का कार्य संविधान सभा ने किया था। इस सभा का गठन 1946 में हुआ था। संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को हुई थी। इस सभा में देश के विभिन्न हिस्सों से चुने गए प्रतिनिधि शामिल थे, जिन्होंने मिलकर भारत के लिए सबसे उपयुक्त संविधान बनाने का प्रयास किया। संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे, जो आगे चलकर भारत के पहले राष्ट्रपति बने।

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संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अम्बेडकर थे। उन्होंने संविधान को व्यवस्थित और स्पष्ट रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके ज्ञान, दूरदर्शिता और सामाजिक न्याय के विचारों ने संविधान को मजबूती प्रदान की। इसी कारण उन्हें ‘भारतीय संविधान का शिल्पकार’ कहा जाता है।

कितना समय लगा संविधान निर्माण में
भारतीय संविधान के निर्माण में लगभग 2 वर्ष 11 महीने और 18 दिन लगे। इतने लंबे समय तक विचार-विमर्श, बहस और चर्चा के बाद संविधान को अंतिम रूप दिया गया। इस दौरान संविधान सभा की कुल 11 बैठकें हुईं, जिनमें हर विषय पर गहराई से चर्चा की गई। यह दर्शाता है कि संविधान जल्दबाजी में नहीं, बल्कि बहुत सोच-समझकर बनाया गया।

दुनिया का सबसे लम्बा लिखित संविधान
भारतीय संविधान को दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान माना जाता है। मूल संविधान में 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं। समय-समय पर संशोधनों के कारण आज इसमें और भी अनुच्छेद और अनुसूचियां जुड़ चुकी हैं। इसकी लंबाई का कारण यह है कि इसमें देश की विविधता, सामाजिक परिस्थितियों और प्रशासनिक आवश्यकताओं को विस्तार से शामिल किया गया है।

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दुनिया भर से ली गई अच्छी बातें
भारतीय संविधान के कई प्रावधान दुनिया के अन्य देशों के संविधानों से प्रेरित हैं। जैसे—
मौलिक अधिकार अमेरिका के संविधान से।
राज्य के नीति-निर्देशक तत्व आयरलैंड से।
संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से।
और आपातकाल से संबंधित प्रावधान जर्मनी से लिए गए हैं।
इस प्रकार भारतीय संविधान विभिन्न देशों के अच्छे विचारों का सुंदर संगम है।

कब हुआ लागू

भारतीय संविधान को 26 नवम्बर, 1949 को संविधान सभा ने अंगीकृत किया था, लेकिन इसे लागू 26 जनवरी, 1950 को किया गया। 26 जनवरी की तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन 1930 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। इसी कारण हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है।

हाथ से लिखा गया
संविधान की एक खास बात यह भी है कि इसे हाथ से लिखा गया था। इसे प्रसिद्ध सुलेखकार प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने बेहद सुंदर अक्षरों में लिखा। संविधान के प्रत्येक पृष्ठ को कलाकारों द्वारा सजाया गया है। इसके चित्रों और डिजाइनों में भारत की संस्कृति, इतिहास और परम्पराओं की झलक दिखाई देती है।

अधिकारों के साथ ही मौलिक कर्तव्य भी हैं
भारतीय संविधान सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है, जैसे समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, धर्म की स्वतंत्रता, शिक्षा का अधिकार आदि। ये अधिकार नागरिकों को एक सम्मानजनक और स्वतंत्र जीवन जीने में सहायता करते हैं। साथ ही संविधान नागरिकों को मौलिक कर्तव्य भी याद दिलाता है, ताकि वे देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

लचीला और कठोर
भारतीय संविधान को लचीला और कठोर, दोनों माना जाता है। इसका मतलब है कि कुछ प्रावधानों को आसानी से बदला जा सकता है, जबकि कुछ में बदलाव के लिए विशेष प्रक्रिया अपनानी पड़ती है। अब तक संविधान में कई संशोधन किए जा चुके हैं, जिससे यह समय और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालता रहा है। एक और रोचक तथ्य यह है कि भारतीय संविधान धर्मनिरपेक्ष है। इसका अर्थ है कि भारत किसी एक धर्म को नहीं मानता, बल्कि सभी धर्मों को समान सम्मान देता है। यही कारण है कि भारत में हर धर्म, जाति और समुदाय के लोग मिलजुल कर रहते हैं।

भारतीय संविधान केवल सरकार के लिए नहीं, बल्कि हर नागरिक के लिए एक मार्गदर्शक है। यह हमें अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी बोध कराता है। भारतीय संविधान की महानता इसी में है कि यह करोड़ों लोगों को एक सूत्र में बांधकर लोकतंत्र, समानता और न्याय का मार्ग दिखाता है। हमें इसका सम्मान करना चाहिए और इसके आदर्शों का पालन कर एक जिम्मेदार नागरिक बनना चाहिए।
 
 
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