Lakshmi Jayanti 2026 : मार्च में कब मनाई जाएगी लक्ष्मी जयंती, जानें क्या चंद्र ग्रहण डालेगा असर ?

Edited By Updated: 27 Feb, 2026 09:45 AM

lakshmi jayanti 2026

Lakshmi Jayanti 2026 : हिंदू धर्म में धन, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस को लक्ष्मी जयंती के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व बहुत खास होने वाला है क्योंकि इस दिन न केवल फाल्गुन पूर्णिमा का संयोग है बल्कि...

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Lakshmi Jayanti 2026 : हिंदू धर्म में धन, सुख और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी मां लक्ष्मी के प्राकट्य दिवस को लक्ष्मी जयंती के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में यह पर्व बहुत खास होने वाला है क्योंकि इस दिन न केवल फाल्गुन पूर्णिमा का संयोग है बल्कि साल का पहला चंद्र ग्रहण भी इसी दिन लगने जा रहा है। आइए जानते हैं लक्ष्मी जयंती 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और चंद्र ग्रहण के साये में पूजा करने के विशेष नियम।

Lakshmi Jayanti 2026

Lakshmi Jayanti लक्ष्मी जयंती 2026

लक्ष्मी जयंती तिथि: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 2 मार्च 2026 को शाम 05:55 बजे से

पूर्णिमा तिथि का समापन: 3 मार्च 2026 को शाम 05:07 बजे तक

उदया तिथि: उदया तिथि के अनुसार, लक्ष्मी जयंती का मुख्य पर्व 3 मार्च को ही मनाया जाएगा।

Lakshmi Jayanti 2026

क्या चंद्र ग्रहण डालेगा असर ?
3 मार्च 2026 को साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषीय दृष्टि से यह एक बड़ी घटना है क्योंकि यह लक्ष्मी जयंती और होली के दिन पड़ रहा है।

ग्रहण का समय और सूतक काल
चंद्र ग्रहण का प्रारंभ: दोपहर 03:20 बजे (3 मार्च)
चंद्र ग्रहण का समापन: शाम 06:47 बजे (3 मार्च)
सतक काल: चंद्र ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले लग जाता है। भारत में सूतक काल सुबह लगभग 06:23 बजे से शुरू हो जाएगा।

ग्रहण के दौरान कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा ?

सूतक काल से पूर्व की पूजा
यदि आप विस्तृत पूजा या हवन करना चाहते हैं, तो उसे सूतक काल शुरू होने से पहले यानी 3 मार्च को सुबह 06:00 बजे तक संपन्न कर लें। ब्रह्म मुहूर्त में किया गया लक्ष्मी पूजन अत्यंत फलदायी होगा।

ग्रहण काल में मानसिक जाप
ग्रहण के दौरान भले ही आप मूर्ति स्पर्श न करें लेकिन यह समय मंत्र सिद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। ग्रहण काल के बीच आप मां लक्ष्मी के मंत्रों का मानसिक जाप कर सकते हैं:

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः

श्री सूक्त का पाठ 

 ग्रहण के बाद शुद्धिकरण
शाम 06:47 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद पूरे घर में गंगाजल छिड़कें। स्वयं स्नान करें और मां लक्ष्मी की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराकर शुद्ध करें। इसके बाद दीप जलाकर आरती करें।

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