Basoda 2026: क्यों ठंडा रहता है बासोड़ा पर घर का चूल्हा? जानें इस परंपरा के पीछे छिपे अनसुने धार्मिक और वैज्ञानिक राज

Edited By Updated: 05 Mar, 2026 02:39 PM

basoda festival 2026

भारतीय संस्कृति के कैलेंडर में बासोड़ा या शीतला अष्टमी एक ऐसा अनूठा पर्व है, जो आधुनिक दुनिया के No Cooking Day की याद दिलाता है। होली के ठीक आठ दिन बाद आने वाला यह त्योहार अपनी एक खास परंपरा के लिए प्रसिद्ध है।

Basoda 2026 : भारतीय संस्कृति के कैलेंडर में बासोड़ा या शीतला अष्टमी एक ऐसा अनूठा पर्व है, जो आधुनिक दुनिया के No Cooking Day की याद दिलाता है। होली के ठीक आठ दिन बाद आने वाला यह त्योहार अपनी एक खास परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। इस दिन घर की रसोई में चूल्हा नहीं जलता और पूरा परिवार एक दिन पहले बना हुआ बासी भोजन ही ग्रहण करता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि जिस समाज में ताजा भोजन को अमृत माना जाता है, वहां एक पूरा दिन बासी खाने को क्यों समर्पित किया गया है। जहां एक ओर भक्त आरोग्य की देवी माता शीतला को प्रसन्न करने के लिए अग्नि का त्याग करते हैं, वहीं दूसरी ओर आयुर्वेद और विज्ञान इस परंपरा को बदलते मौसम के साथ तालमेल बैठाने का एक मास्टर स्ट्रोक मानते हैं। तो आइए जानते हैं कि बासोड़ा पर चूल्हा ठंडा रखने के पीछे की धार्मिक और वैज्ञानिक राज के बारे में-

Basoda Festival 2026

बासोड़ा धार्मिक कारण
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता शीतला को स्वच्छता और आरोग्य की देवी माना गया है। मान्यता है कि माता शीतला को शीतलता अत्यंत प्रिय है। चूल्हा जलाना अग्नि और गर्मी का प्रतीक है। इसलिए, मां को प्रसन्न करने के लिए इस दिन घर में आग नहीं जलाई जाती ताकि वातावरण पूरी तरह शांत और शीतल रहे। मान्यता है कि जो परिवार इस दिन ठंडा भोजन करके माता की पूजा करता है, उस घर के सदस्य चेचक, खसरा और नेत्र रोगों जैसी बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं।

Basoda Festival 2026

बासोड़ा वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण 
बासोड़ा का त्योहार चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। यह वह समय होता है जब ऋतु परिवर्तन अपने चरम पर होता है। होली के बाद वसंत ऋतु विदा हो रही होती है और गर्मी ऋतु की शुरुआत होती है। इस संधिकाल में शरीर का तापमान असंतुलित होने का खतरा रहता है। ठंडा भोजन शरीर को आने वाली भीषण गर्मी के लिए तैयार करने का एक प्राकृतिक तरीका है। आयुर्वेद के अनुसार, मौसम बदलते समय भूख थोड़ी मंद हो जाती है। एक दिन चूल्हा न जलाकर हल्का और ठंडा भोजन करना पाचन तंत्र को डिटॉक्स करने जैसा है। प्राचीन समय में इस दिन का विशेष महत्व स्वच्छता से था। बासी भोजन का सेवन एक तरह का 'इम्यूनिटी टेस्ट' भी माना जाता था, क्योंकि इसके बाद गर्मियां शुरू हो जाती थीं और भोजन जल्दी खराब होने लगता था। बासोड़ा वह आखिरी दिन होता था जब बासी भोजन खाया जा सकता था, इसके बाद पूरी गर्मियों में ताजा भोजन करने की सलाह दी जाती थी।

बासोड़ा 2026 क्या है विशेष?
वर्ष 2026 में बासोड़ा का पर्व मार्च के महीने में मनाया जाएगा। इस दिन घरों में मुख्य रूप से दही, राबड़ी, कैर-सांगरी की सब्जी, पुए और बाजरे की रोटी एक रात पहले ही बना ली जाती है। सुबह माता की पूजा के बाद पूरा परिवार एक साथ बैठकर इस ठंडे प्रसाद का आनंद लेता है।

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