Edited By Prachi Sharma,Updated: 08 Mar, 2026 08:41 AM

Rang Panchami 2026 : रंग पंचमी केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि इसे भक्ति, आनंद और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रंग पंचमी मनाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का...
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Rang Panchami 2026 : रंग पंचमी केवल रंगों का उत्सव नहीं है, बल्कि इसे भक्ति, आनंद और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा पर्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रंग पंचमी मनाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दिन देवी-देवता स्वयं पृथ्वी लोक पर आकर होली के रंगों का आनंद लेते हैं। पंचांग के अनुसार यह पर्व हर वर्ष चैत्र मास की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष रंग पंचमी 8 मार्च को मनाई जा रही है। इस पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जो इसके महत्व को और भी विशेष बनाती हैं।
राधा-कृष्ण से जुड़ी रंग पंचमी की कथा
धार्मिक कथाओं के अनुसार, त्रेता युग की शुरुआत में भगवान विष्णु ने ‘धुली वंदन’ के माध्यम से रंगों के प्रतीक रूप में अवतार धारण किया था। माना जाता है कि भगवान कृष्ण के जीवन में भी रंगों का विशेष महत्व रहा है। उनके विभिन्न रूप, लीलाएं और गुण रंगों की तरह ही विविध और आकर्षक माने जाते हैं।
कथा के अनुसार, चैत्र मास की पंचमी तिथि को भगवान कृष्ण ने राधा जी के साथ रंगों की होली खेली थी। जब वे दोनों प्रेम और आनंद के साथ होली खेल रहे थे, तब यह दृश्य इतना मनमोहक था कि वृंदावन की गोपियां भी इसमें शामिल हो गईं। वातावरण में रंगों और उल्लास की ऐसी छटा बिखरी कि देवता भी इस दृश्य को देखने के लिए आकर्षित हो गए। कहा जाता है कि देवताओं ने गोपी और ग्वालों का रूप धारण कर पृथ्वी पर आकर इस उत्सव में भाग लिया। उनकी प्रसन्नता में सभी ने आसमान में गुलाल उड़ाया। तभी से रंग पंचमी के दिन गुलाल उड़ाने की परंपरा प्रचलित मानी जाती है। यह पर्व हमें प्रेम, एकता और अच्छाई की विजय का संदेश भी देता है।
भगवान राम से जुड़ी रंग पंचमी की कथा
एक अन्य मान्यता के अनुसार फाल्गुन मास की पंचमी तिथि का संबंध भगवान राम से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक कथाओं में बताया जाता है कि अपने 14 वर्ष के वनवास के दौरान भगवान राम जब यात्रा करते हुए चंदेरी क्षेत्र से गुजरे थे, तब उन्होंने इस पवित्र भूमि पर कदम रखा था।
कहा जाता है कि उनके आगमन से यह स्थान पवित्र हो गया और लोगों ने इस दिन को उत्सव के रूप में मनाना शुरू कर दिया। इसी परंपरा के चलते होली के पांच दिन बाद मध्य प्रदेश के करीला पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोग रंग पंचमी का पर्व विशेष उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन वहां पारंपरिक नृत्य, संगीत और रंग-गुलाल के साथ खुशी का माहौल रहता है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर भगवान राम के आगमन की खुशी का उत्सव मनाते हैं।
इस प्रकार रंग पंचमी केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, भक्ति और पौराणिक आस्थाओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो लोगों को प्रेम, आनंद और एकता का संदेश देता है।