Edited By Sarita Thapa,Updated: 04 Jun, 2026 11:53 AM

एक साधु रोज नदी के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था, ‘‘जो चाहोगे सो पाओगे, जो चाहोगे सो पाओगे।’’ बहुत से लोग वहां से गुजरते पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीं देता और सब उसे एक पागल आदमी समझते।
Inspirational Context : एक साधु रोज नदी के किनारे बैठ कर चिल्लाया करता था, ‘‘जो चाहोगे सो पाओगे, जो चाहोगे सो पाओगे।’’ बहुत से लोग वहां से गुजरते पर कोई भी उसकी बात पर ध्यान नहीं देता और सब उसे एक पागल आदमी समझते।
एक दिन एक युवक वहां से गुजरा और उसने भी उस साधु की आवाज सुनी। समीप जाकर उसने साधु से पूछा, ‘‘क्या आप मुझको वह वस्तु दे सकते हो जो मैं चाहता हूं?’’
साधु बोला, ‘‘हां बेटा तुम जो कुछ भी चाहते हो मैं उसे जरूर दूंगा, बस तुम्हें मेरी एक बात माननी होगी। हालांकि पहले यह तो बताओ कि तुम्हें चाहिए क्या?’’ युवक बोला, ‘‘मैं हीरों का बहुत बड़ा व्यापारी बनना चाहता हूं।’’
साधु बोला, ‘‘कोई बात नहीं मैं तुम्हें एक ‘हीरा’ और एक ‘मोती’ देता हूं, उससे तुम जितने भी हीरे-मोती बनाना चाहोगे बना पाओगे।’’

साधु ने अपना हाथ आदमी की हथेली पर रखते हुए कहा, ‘‘पुत्र मैं तुम्हें दुनिया का सबसे अनमोल हीरा दे रहा हूं, लोग इसे ‘समय’ कहते हैं, इसे तेजी से अपनी मुट्ठी में पकड़ लो और इसे कभी मत गंवाना।’’
युवक अभी कुछ सोच ही रहा था कि साधु उसकी दूसरी हथेली पकड़ते हुए बोला, ‘‘पुत्र इसे भी संभालो। यह दुनिया का सबसे कीमती मोती है, लोग इसे ‘धैर्य’ कहते हैं, जब कभी समय देने के बावजूद परिणाम अनुकूल न मिले तो इस कीमती मोती को धारण कर लेना, याद रखना जिसके पास धैर्य रूपी मोती है, वह दुनिया में कुछ भी प्राप्त कर सकता है।’’
युवक ने साधु की बातों पर विचार करते हुए निश्चय किया कि आज से वह अपना समय बर्बाद नहीं करेगा और हमेशा धैर्य से काम लेगा। ऐसा सोच कर उसने हीरों के एक व्यापारी के यहां काम करना शुरू कर दिया। मेहनत और ईमानदारी के बल पर एक दिन वह खुद हीरों का बहुत बड़ा कारोबारी बन गया।

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