Edited By Sarita Thapa,Updated: 13 Jul, 2026 12:39 PM

एक बार शिवाजी अपने शयनकक्ष में सोए हुए थे, तभी एक बालक पहरेदारों से बचता हुआ हाथ में तलवार लिए उनके कक्ष में आ पहुंचा। वह शिवाजी पर हमला करने ही वाला था कि उनके सेनापति तानाजी ने उसे देख लिया।
Chhatrapati Shivaji Maharaj Story : एक बार शिवाजी अपने शयनकक्ष में सोए हुए थे, तभी एक बालक पहरेदारों से बचता हुआ हाथ में तलवार लिए उनके कक्ष में आ पहुंचा। वह शिवाजी पर हमला करने ही वाला था कि उनके सेनापति तानाजी ने उसे देख लिया। इससे पूर्व कि वह बालक कुछ कर पाता, उसे बंदी बना लिया गया।
तभी शिवाजी की भी नींद खुल गई। उन्होंने जब बालक के हाथ में तलवार देखी तो उससे पूछा, ''बालक, तुम इस तरह तलवार लेकर मेरे कक्ष में क्यों आए?
क्या तुम हमें मारना चाहते थे?" बालक ने डरते-डरते सिर हिलाया। तब शिवाजी ने उससे पूछा, ''आखिर तुम हमें मारना क्यों चाहते थे?"
तब बालक ने कहा, ''महाराज, मेरे पिता आपकी सेना में एक सैनिक थे। वह युद्ध में मारे गए। मेरी मां काफी दिनों से बीमार चल रही है। मैं किसी काम की तलाश में निकला था कि आपके एक शत्रु ने कहा, ''तू शिवाजी को मार दे, तो मैं तुझे बहुत-सा धन दूंगा। मैं उसी कारण यह पता होते हुए भी कि पकड़े जाने पर मृत्युदंड मिलेगा, आपको मारने चला आया।"

उसकी बात सुनकर तानाजी ने कहा, ''तू रंगे हाथ पकड़ा गया है और अब तुझे अपनी जान देनी होगी।"
बालक बोला, ''मेरी मां बहुत बीमार है। मैं उसे प्रणाम कर कल सुबह वापस आ जाऊंगा। कृपया अभी मुझे जाने दें।"
शिवाजी सभी बातें देख-सुन रहे थे। उन्होंने उदारता दिखाते हुए कहा, ''बालक, तुम जाओ। कल आ जाना।"
अगले दिन बालक दरबार में आया और आत्मसमर्पण कर दिया। शिवाजी ने भरी सभा में कहा, ''यह सत्यनिष्ठ बालक हमारे वीर सैनिक का बेटा है। भूल हमसे हुई है। हमने उसके परिवार का ध्यान नहीं रखा। हम इसे क्षमा कर आजीवन भरण-पोषण की व्यवस्था करते हैं।" इस घटना के बाद शिवाजी ने अपने सैनिकों के जीवनकाल व मृत्यु के बाद उनके परिवार के उचित भरण-पोषण की योजना बनाई।

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