Edited By Sarita Thapa,Updated: 24 Jul, 2026 01:15 PM

अमरीका भ्रमण के दौरान स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर एक अमरीकी प्रोफैसर उनके पास आया और कहा, “कृपया आप मुझे अपने हिंदू धर्म में दीक्षित कर लें।”
Swami Vivekananda Story : अमरीका भ्रमण के दौरान स्वामी विवेकानंद के विचारों से प्रेरित होकर एक अमरीकी प्रोफैसर उनके पास आया और कहा, “कृपया आप मुझे अपने हिंदू धर्म में दीक्षित कर लें।”
स्वामी जी बोले,“मैं यहां धर्म प्रचार के लिए आया हूं न कि धर्म परिवर्तन के लिए। मैं अमरीकी धर्म-प्रचारकों को यह संदेश देने आया हूं कि वे धर्म परिवर्तन के अभियान को बंद कर सभी धर्म के लोगों को बेहतर इंसान बनाने का प्रयास करें। हिंदू संस्कृति मानवता को सबसे बड़ा धर्म मानती है।”

प्रोफैसर बोले, “स्वामी जी, कृपया इस बारे में और विस्तार से कहिए।” स्वामी जी ने कहा कि महाशय, इस पृथ्वी पर सबसे पहले मानव सभ्यता अस्तित्व में आई। उस समय कहीं कोई धर्म या जाति नहीं थी। मानव ने अपनी सुविधानुसार अपनी-अपनी भाषाओं, धर्म तथा जाति का निर्माण किया और मुख्य उद्देश्य से भटक गया। यही कारण है कि समाज में तरह-तरह की बुराइयां आ गई हैं।
स्वामी जी ने बात जारी रखते हुए कहा कि मेरा सुझाव है कि तुम अपना धर्म पालन करते हुए अच्छे ईसाई बनो। सभी धर्मों का सार मानवता के गुणों को विकसित करना है इसलिए तुम भारत के ऋषियों-मुनियों के अच्छे विचारों का लाभ उठाओ और उन्हें अपने जीवन में उतारो। प्रोफैसर मंत्रमुग्ध भाव से यह सब सुनते रहे। स्वामी जी के प्रति उनकी आस्था और बढ़ गई।

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