जीवन की हर बाधा को पार करना है तो बहते जल से सीखिए यह गुण

Edited By Updated: 01 Jun, 2026 01:55 PM

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एक लड़का परीक्षा में असफल हो गया। साथियों ने उसका खूब मजाक उड़ाया। वह पीड़ा बर्दाश्त नहीं कर पाया और घर लौटकर तनाव में डूब गया। उसके माता-पिता ने उसे बहुत समझाया, "बेटा, फेल होना इतनी बड़ी असफलता नहीं है कि तुम इतने परेशान हो जाओ।

Inspirational Story : एक लड़का परीक्षा में असफल हो गया। साथियों ने उसका खूब मजाक उड़ाया। वह पीड़ा बर्दाश्त नहीं कर पाया और घर लौटकर तनाव में डूब गया। उसके माता-पिता ने उसे बहुत समझाया, "बेटा, फेल होना इतनी बड़ी असफलता नहीं है कि तुम इतने परेशान हो जाओ। जब तक इंसान अच्छे-बुरे, सफलता-असफलता के दौर से खुद नहीं गुजरता, तब तक वह बड़े काम नहीं कर सकता।"

लड़के को संतुष्टि नहीं हुई। अशांति और निराशा में जब उसे कुछ नहीं सूझा और रात में वह आत्महत्या करने के लिए चल दिया। रास्ते में उसे एक बौद्ध मठ दिखा। वहां से कुछ आवाजें आ रही थीं। वह उत्सुकतावश बौद्ध मठ के अंदर चला गया। वहां उसने सुना!  एक भिक्षुक कह रहा था, "पानी गंदा क्यों नहीं होता? 

क्योंकि वह बहता रहता है। उसके मार्ग की बाधाएं क्यों नहीं टिकतीं? 

क्योंकि वह बहता रहता है। पानी का एक बिंदू झरने से नदी, नदी से महानदी और फिर समुद्र क्यों बन जाता है? 

क्योंकि वह बहता है। इसलिए मेरे जीवन तुम रुको मत, बहते रहो। कुछ असफलताएं आती हैं पर तुम उनसे घबराओ मत। उन्हें लांघकर मेहनत करते चलो। बहना और चलना ही जीवन है। असफलता से घबराकर रुक गए तो उसी तरह सड़ जाओगे जैसे रुका हुआ पानी सड़ जाता है।"

यह सुनकर लड़के ने मन में यह ठान लिया कि उसे भी बहते जल की तरह बनना है। इसी सोच के साथ वह घर की ओर मुड़ गया। अगले दिन वह सामान्य होकर स्कूल की ओर चल दिया। आगे चलकर यही लड़का बड़ा राजनेता बना।

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