Edited By Ramkesh,Updated: 22 Jul, 2026 08:19 PM

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि वह अपना आमरण अनशन तभी समाप्त करेंगे जब केंद्र सरकार इस बात का‘स्पष्ट और पक्का आश्वासन'दे कि हालिया प्रदर्शनों में शामिल हुए विद्यार्थियों पर कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कारर्वाई नहीं की...
नेशनल डेस्क: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बुधवार को कहा कि वह अपना आमरण अनशन तभी समाप्त करेंगे जब केंद्र सरकार इस बात का‘स्पष्ट और पक्का आश्वासन'दे कि हालिया प्रदर्शनों में शामिल हुए विद्यार्थियों पर कोई दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कारर्वाई नहीं की जाएगी।
विद्यार्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा देना
वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म‘एक्स'पर केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह को संबोधित एक पत्र साझा करते हुए अस्पताल में उनसे मुलाकात करने और अनशन खत्म करने की अपील करने के लिए नेताओं का धन्यवाद किया। वांगचुक ने बताया कि मंत्रियों ने उन्हें आश्वासन दिया है कि सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी। इन मांगों में प्रश्नपत्र लीक के कारण आत्महत्या करने वाले विद्यार्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा देना तथा जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा कराना शामिल है। इस चर्चा के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मुद्दे पर भी विचार किया जाएगा।
पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की
वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि भूख हड़ताल वापस लेने से पहले एक और महत्वपूर्ण आश्वासन आवश्यक है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा, 'मैं सरकार से सम्मानपूर्वक एक स्पष्ट आश्वासन का अनुरोध करता हूं कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी को किसी भी दंडात्मक या प्रतिशोधात्मक कानूनी कारर्वाई का सामना न करना पड़े।' उन्होंने कहा कि इन विद्यार्थियों का एकमात्र‘अपराध'एक‘निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली'के लिए अपनी आवाज उठाना था। श्री वांगचुक ने 20 जुलाई को निकाले गये‘चलो संसद'मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर भी चिंता व्यक्त की।
65 सांसदों ने वांगचुक को लिखा पत्र
उन्होंने पुलिस द्वारा किए गए‘अत्याचारों और अत्यधिक बल प्रयोग'के बावजूद प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, 'पूरे देश और दुनिया ने लोकतांत्रिक विरोध के प्रति उनके धैर्य और प्रतिबद्धता को देखा है।' वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के लगभग 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर या मुलाकात कर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। उनके अनुरोधों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि वे‘उन युवाओं की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकते जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था। सामाजिक कार्यकर्ता ने लिखा, 'यदि ऐसा आश्वासन दिया जाता है, तो मैं इस विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर दूंगा कि सरकार ने न केवल मेरी अपील सुनी है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों की आकांक्षाओं को भी समझा है। ऐसे आश्वासन के अभाव में, मैं अनिश्चित काल तक अपना अनशन जारी रखने के लिए मजबूर हो जाऊंगा।