Kajari Teej 2026 : कब मनाई जाएगी कजरी तीज, जानिए तिथि, पूजा विधि और शुभ समय की पूरी जानकारी

Edited By Updated: 24 Aug, 2026 04:51 PM

kajari teej 2026

हिंदू धर्म में कजरी तीज का बहुत खास महत्व है। हर साल भादप्रद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है। इसके सातुड़ी तीज या बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है।

Kajari Teej 2026 : हिंदू धर्म में कजरी तीज का बहुत खास महत्व है। हर साल भादप्रद माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज का व्रत रखा जाता है। इसके सातुड़ी तीज या बड़ी तीज के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन देवों करे देव महादेव की और माता पार्वती की पूजा करने का विधान है। यह पर्व मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु, उत्तम सेहत औक अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। वहीं, अविवाहित कन्याओं द्वारा मनचाहा वर प्राप्त करने के लिए इस दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। तो आइए जानते हैं कजरी तीज के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-

Kajari Teej 2026

कजरी तीज 2026 डेट

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 30 अगस्त को सुबह 9 बजकर 36 मिनट पर होगी और तृतीया तिथि का समापन 31 अगस्त को सुबह 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, कजरी तीज 31 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी।

कजरी तीज 2026 शुभ मुहूर्त

कजरी तीज के दिन पूजा के लिए  ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 51 मिनट से सुबह 5 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त का आरंभ दोपहर 12 बजकर 14 मिनट पर होगा और समाप्त दोपहर 1 बजकर 4 मिनट पर होगा। संध्या काल मुहूर्त शाम 6 बजकर 54 मिनट से रात 8 बजकर 3 मिनट पर होगा।

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कजरी तीज पूजा विधि 

कजरी तीज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। 

उसके बाद घर के  मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करने के बाद व्रत का संकल्प लें। 

फिर एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर शिव जी और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।

माता पार्वती को सिंदूर, रोली, चूड़ियां, चुनरी, मेहंदी और 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और चंदन चढ़ाएं।

कजरी तीज पर गेहूं, चने या चावल के सत्तू में घी और मेवे मिलाकर बनाए गए विशेष पकवान का भोग लगाएं। 

इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए उनके नामों और मंत्रों का जाप करें।

अंत में शिव जी और माता पार्वती के तस्वीर या मूर्ति के समक्ष घी का दीपक जलाएं और आरती करें। 

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