Edited By Sarita Thapa,Updated: 02 Sep, 2026 04:52 PM

सितंबर महीने की शुरुआत हो चुकी है और इसके शुरुआत के साथ ही 04 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व भी मनाया जाएगा। जन्माष्टमी का पर्व आते ही सब तरफ रौनक छा जाती है। पिछली बार से भी ज्यादा अच्छे तरीके से जन्माष्टमी कैसे मनाई जाए, हर कोई इसी कोशिश में लगा...
Laddu Gopal Sthapana Vidhi : सितंबर महीने की शुरुआत हो चुकी है और इसके शुरुआत के साथ ही 04 सितंबर को जन्माष्टमी का पर्व भी मनाया जाएगा। जन्माष्टमी का पर्व आते ही सब तरफ रौनक छा जाती है। पिछली बार से भी ज्यादा अच्छे तरीके से जन्माष्टमी कैसे मनाई जाए, हर कोई इसी कोशिश में लगा रहता है। हर तरफ जन्माष्टमी से जुड़ी खरीदारी करते लोग नज़र आते हैं। ऐसे में बहुत से लोग इस जन्माष्टमी के अवसर पर बाल गोपाल को भी घर पर लाते हैं। जी हां, दरअसल बहुत से लोग इस पावन अवसर पर पहली बार लड्डू गोपाल को घर लाते हैं,लेकिन क्या आप जानते हैं कि घर में बाल गोपाल को लाने के बाद उनकी स्थापना कुछ खास विधि-विधान और नियमों के साथ की जाती है। कहा जाता है कि सही तरीके से लड्डू गोपाल की स्थापना और पूजा करने से घर में भगवान श्री कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। यदि आप इस बार पहली बार अपने घर पर बाल गोपाल लाने का विचार कर रहे हैं, तो इसी से जुड़ी कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।
जन्माष्टमी की सुबह सबसे पहले घर की अच्छे तरीके से साफ सफाई करें और फिर स्नान करें और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। फिर मंदिर की साफ-सफाई करने के बाद सारे घर और मंदिर में गंगाजल से छिड़काव करें। जिन भक्तों ने जन्माष्टमी का व्रत रखा है, वे अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत का पालन करें। व्रत रखने वाले भक्त अपनी परंपरा के अनुसार अन्न का त्याग करते हैं। लड्डू गोपाल जी को स्थापित करने के लिए उत्तर-पूर्व दिशा को बेहद ही शुभ माना जाता है, ऐसे में उनका सिंहासन उसी दिशा में स्थापित करें। फिर लड्डू गोपाल को लाएं और उनका पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल करें। फिर धीरे-धीरे प्रेम से लड्डू गोपाल का अभिषेक करें फिर साफ जल से अभिषेक करें और साफ कपड़े से साफ करें। फिर नए वस्त्र पहनाएं और चंदन का तिलक लगाएं। वैसे तो जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में मुख्य पूजा करने की रीत है। तो ऐसे में आप रात के शुभ मुहूर्त में लड्डू गोपाल जी की पूजा कर सकते हैं।

रात के समय पूजा करने के लिए उन्हें एक पीतल के पात्र में बैठाएं और पंचामृत से अभिषेक करें। स्नान कराते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जप करें। फिर स्नान के अंत में दक्षिणावर्ती शंख में जलभरकर लड्डू गोपाल जी पर अर्पित करें। फिर उन्हें साफ करें और सुंदर पीले रंग के वस्त्र पहनाएं और श्रृंगार करें। उन्हें मुकट, बांसुरी, कुंडल, कंगन, कमरधनी और वैजयंती माला अर्पित करें। माथे पर चंदन लगाएं और हो सकें तो आंखों में काजल सजाएं। इसके बाद उन्हें सिंहासन पर बैठाकर या झूले में बैठाएं। उनके सामने घी का दीपक जलाएं और पूजा करें फिर माखन और मिश्री का भोग लगाएं। कान्हा को धनिया की पंजीरी बेहद अत्यंत प्रिय मानी गई है इसलिए उन्हें बाकी भोग अर्पित करते समय धनिया की पंजीरी का भोग ज़रूर अर्पित करें। ध्यान रहें कि लड्डू गोपाल के हर भोग में तुलसी की पत्ता अवश्य हो क्योंकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लड्डू गोपाल जी बिना तुलसी के भोग ग्रहण नहीं करते हैं। लेकिन साथ ही यह भी बता दें कि जन्माष्टमी के अवसर पर तुलसी के तोड़ना वर्जित माना जाता है तो एक दिन पहले तुलसी को तोड़ कर रख लें। फिर लड्डू गोपाल को प्रेम से झूला झूलाएं और फूल अर्पित करें और उनकी आरती गाते हुए उनकी पूजा संपन्न करें।

रोज़ाना लड्डू गोपाल जी की सेवा करना अत्यंत ज़रूरी है, क्योंकि अब से वह आपके घर के सदस्य है। उन्हें रोज़ सुबह प्रेम और ध्यान से उठाएं और स्न्नान करवाके वस्त्र पहनाएं श्रृंगार करें और पूजा कर भोग अर्पित करें। लड्डू गोपाल का भोग पूरी तरह से सात्विक होना चाहिए और घर में कुछ भी बनाएं और वह सात्विक है तो पहले कान्हा को भोग अर्पित करें अंत में प्रसाद के रुप में बाकी घर वाले ग्रहण करें। कान्हा को दिन में तीन से चार बार भोग लगाएं, उनकी जल सेवा अवश्य करें और रात को सोने से पहले लाड करें और लोरी गाकर सुलाएं फिर ही सभी सदस्य सोने जाएं।

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