Edited By Sarita Thapa,Updated: 14 May, 2026 10:10 AM

भारत में गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि इसका धार्मिक महत्व है और इससे लोगों की आस्था और संस्कृति जुड़ी है। मान्यता है कि इसका जल इतना पावन है कि इसमें नहाने से सारे कष्ट, रोग और पाप दूर हो जाते हैं।
Kaveri River Significance : भारत में गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि इसका धार्मिक महत्व है और इससे लोगों की आस्था और संस्कृति जुड़ी है। मान्यता है कि इसका जल इतना पावन है कि इसमें नहाने से सारे कष्ट, रोग और पाप दूर हो जाते हैं। यही कारण है कि इस नदी को ‘मोक्षदायिनी’ कहा जाता है। गंगा उत्तर भारत की प्रमुख नदी है, जिसकी लंबाई लगभग 2525 किलोमीटर है। यह उत्तराखंड के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि गंगा की तरह दक्षिण भारत में ऐसी कौन-सी नदी है, जिसे पूजा जाता है।
इस नदी का नाम है कावेरी। यह नदी दक्षिण भारत की प्रमुख नदियों में से एक है। यह कर्नाटक के कोडगु जिले की ब्रह्मगिरी पहाडियों से निकलती है और तमिलनाडु होते हुए बंगाल की खाड़ी में जाकर मिलती है। इसकी लंबाई लगभग 800 किलोमीटर है। जिस तरह गंगा उत्तर भारत के लोगों के जीवन, खेती और संस्कृति का आधार है, उसी तरह कावेरी नदी दक्षिण भारत की संस्कृति, कृषि और आस्था से जुड़ी है।

कावेरी नदी का धार्मिक महत्व
कावेरी नदी का उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों और पुराणों में मिलता है। इसे देवी स्वरूपा माना गया है और ‘कावेरी अ मा’ के रूप में पूजा जाता है। तमिलनाडु में कावेरी स्नान को गंगा स्नान के समान पुण्यदायी माना जाता है। हर साल यहां कावेरी पुष्करम जैसे धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु नदी में स्नान करने आते हैं।
दो बड़े राज्यों की जीवनरेखा है
कावेरी नदी दक्षिण भारत के दो बड़े राज्यों कर्नाटक और तमिलनाडु की जीवनरेखा है। इस नदी के जल से लाखों एकड़ भूमि की सिंचाई होती है और करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी इस पर निर्भर करती है। इस नदी के किनारे बसे शहर जैसे मैसूर, त्रिची और तंजावुर इसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। ऐसे में कावेरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा के रूप में माना जाता है। यह एक ऐसी नदी है जो न केवल जल प्रदान करती है, बल्कि दक्षिण भारत की संस्कृति, भक्ति और जीवन को भी पोषित करती है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ