Edited By Sahil Kumar,Updated: 14 May, 2026 05:43 PM

मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत में गैस का संकट गहराया। भविष्य में ऐसी समस्या न हो, इसके लिए सरकार ने नई योजना बनाई है, जिससे गैस संकट से निपटा जा सकता है। अगर यह योजना पूरी हुई तो होर्मुज स्ट्रेट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस योजना के तहत समुद्र के नीचे एक...
नेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत में गैस का संकट गहराया। भविष्य में ऐसी समस्या न हो, इसके लिए सरकार ने नई योजना बनाई है, जिससे गैस संकट से निपटा जा सकता है। अगर यह योजना पूरी हुई तो होर्मुज स्ट्रेट की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस योजना के तहत समुद्र के नीचे एक प्राकृतिक गैस पाइपलाइन बिछाई जाएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों से यह जानकारी मिली है और ओमान से भारत तक गैस पाइपलाइन का प्रस्ताव रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार, मिडिल ईस्ट–इंडिया डीप वाटर पाइपलाइन (MEIDP) की लागत करीब 40,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस योजना को पूरा करने में 5 से 7 साल लग सकते है। इसकी लंबाई करीब 2000 KM तक हो सकती है, जो समुद्र में लगभग 3450 मीटर की गहराई में बिछाई जाएगी। योजना के मुताबिक, रोजाना लगभग 31 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस भारत तक पहुंचाई जा सकेगी। भारत में गैस की बढ़ती हुई मांग के कारण अनुमान है कि 2030 तक यह मौजूदा स्तर से और बढ़ सकती है।
पेट्रोलियम मंत्रालय इस परियोजना पर आगे काम बढ़ाने के लिए सार्वजनिक कंपनियों जैसे गेल (GAIL), इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) और इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) से विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराने की योजना बना रहा है। यह प्रस्ताव साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज (SAGE) की प्री-फीजिबिलिटी स्टडी पर आधारित होगा। इस संस्था ने समुद्र के अंदर परीक्षण के लिए एक छोटी डेमो पाइपलाइन भी बिछाई थी, जिससे समुद्र में पाइपलाइन बिछाने और उसकी मरम्मत से जुड़ी तकनीकी संभावनाओं का अध्ययन किया गया।