Edited By Sarita Thapa,Updated: 10 May, 2026 10:39 AM

ओडिशा के कोरापुट जिले और छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की सीमा पर स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर आस्था, रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम है।
Gupteshwar Mahadev Mandir : ओडिशा के कोरापुट जिले और छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल की सीमा पर स्थित गुप्तेश्वर महादेव मंदिर आस्था, रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का अनोखा संगम है। रामगिरी पर्वत शृंखला की पहाड़ियों और घने साल-सागौन के जंगलों के बीच स्थित यह प्राचीन शिवालय श्रद्धालुओं के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों और रोमांच पसंद यात्रियों को भी अपनी ओर आकर्षित करता है। गुफा के भीतर स्थापित विशाल शिवलिंग पर पहाड़ी की छत से लगातार टपकती जलधारा वातावरण को अलौकिक बना देती है।
गुप्तेश्वर महादेव तक पहुंचने का सफर जितना कठिन है, उतना ही रोमांचक भी। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर से धनपुंजी, माचकोट और तिरिया होते हुए यहां पहुंचा जाता है। तिरिया से आगे जंगलों के बीच संकरी और सर्पीली सड़कें शुरू हो जाती हैं, जहां कई स्थानों पर सूर्य की रोशनी तक मुश्किल से पहुंचती है। श्रद्धालुओं को पहले वाहन से शबरी (कोलाब) नदी तक पहुंचना पड़ता है, फिर नदी की विशाल चट्टानों पर बने बांस और चटाई के अस्थायी पुल को पार करना होता है।
यह पुल हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर वन विभाग द्वारा तैयार किया जाता है ताकि श्रद्धालुओं की आवाजाही सुगम हो सके। नदी पार करने के बाद पहाड़ी रास्तों से पैदल यात्रा शुरू होती है। करीब डेढ़ से दो किलोमीटर पैदल चलने और लगभग 170 सीढ़ियां चढ़ने के बाद गुफा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। गुफा के भीतर स्थित विशाल शिवलिंग के दर्शन करते ही यात्रियों की सारी थकान दूर हो जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से दर्शन करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

गुप्तेश्वर को ‘गुप्त केदार’ और ‘शबरी गुप्तेश्वर’ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम दंडकारण्य से पंचवटी जाते समय इस क्षेत्र से होकर गुजरे थे। एक किंवदंती के अनुसार भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव ने यहां गुफा में शरण ली थी। गुफा में आज भी शिवजी के पगचिह्न होने की बात कही जाती है। यहां भगवान भोलेनाथ को चावल का प्रसाद चढ़ाने और गरीब ब्राह्मणों को चावल दान करने की परम्परा भी प्रचलित है। वैसे तो वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष रौनक देखने को मिलती है।
महाशिवरात्रि पर एक सप्ताह तक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें ओडिशा, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। शबरी नदी के दोनों ओर दुकानें सजती हैं और पूरा क्षेत्र ‘बोल बम’ के जयकारों से गूंज उठता है। गुप्तेश्वर महादेव केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, रोमांच और आध्यात्मिक शांति का अद्भुत केंद्र है। घने जंगलों, पहाड़ियों, नदी और गुफा के बीच स्थित यह मंदिर हर यात्री को एक अलग ही अनुभव प्रदान करता है।

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