Edited By Niyati Bhandari,Updated: 11 Apr, 2026 09:05 AM

April Panchak Date and Time: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में 'पंचक' को लेकर हमेशा से एक विशेष सावधानी बरती जाती है। अप्रैल 2026 में लगने वाले पंचक को लेकर लोगों के मन में तारीखों के भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 12 अप्रैल मान रहे हैं, तो...
April Panchak Date and Time: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में 'पंचक' को लेकर हमेशा से एक विशेष सावधानी बरती जाती है। अप्रैल 2026 में लगने वाले पंचक को लेकर लोगों के मन में तारीखों के भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग इसे 12 अप्रैल मान रहे हैं, तो कुछ 13 अप्रैल। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार पंचक 13 अप्रैल 2026, सोमवार से शुरू होने जा रहा है। सोमवार से शुरू होने के कारण इसे 'राज पंचक' का नाम दिया गया है, जिसे ज्योतिष में समृद्धि और वैभव देने वाला माना जाता है।

राज पंचक: क्या है समय और मुहूर्त?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र में गोचर करता है, तब पंचक की स्थिति बनती है।
पंचक आरंभ: 13 अप्रैल 2026 को सुबह 03:44 बजे से।
पंचक समापन: 17 अप्रैल 2026 को दोपहर 12:02 बजे पर।

भूलकर भी न करें ये 5 बड़ी गलतियां
भले ही राज पंचक को कुछ मामलों में शुभ माना गया है, लेकिन शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान ये पांच कार्य पूरी तरह वर्जित हैं:
दक्षिण दिशा की यात्रा: पंचक के दौरान दक्षिण दिशा (यम की दिशा) में यात्रा करना बहुत हानिकारक माना गया है। इससे दुर्घटना का भय और कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं।
लकड़ी और ईंधन का संचय: इस दौरान लकड़ी, घास या अन्य ज्वलनशील ईंधन इकट्ठा नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे अग्नि का भय बना रहता है।
घर की छत डालना: यदि आप नए घर का निर्माण कर रहे हैं, तो पंचक के दौरान लेंटर या छत डालने की गलती न करें। माना जाता है कि इससे घर में क्लेश और आर्थिक हानि होती है।
पलंग या चारपाई बनाना: पंचक में बिस्तर, पलंग या चारपाई बुनना वर्जित है। इससे परिवार के सदस्यों पर बड़ा संकट आने की आशंका रहती है।
शव का अंतिम संस्कार: पंचक के दौरान अंतिम संस्कार सबसे वर्जित कार्य है। यदि बहुत अनिवार्य हो, तो कुश (एक विशेष घास) के पांच पुतले बनाकर उनके साथ दाह संस्कार करना चाहिए ताकि दोष दूर हो सके।
