Edited By Niyati Bhandari,Updated: 25 Sep, 2026 10:24 AM

Pitru Paksha 2026: 26 सितंबर से पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है। पितृ पक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म किया जाता है, लेकिन तर्पण और पूजन के बाद की गई छोटी सी भूल भी पितृ दोष का कारण बन सकती है। जानिए श्राद्ध के बाद किन नियमों का...
Pitru Paksha 2026: धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों के स्मरण, पूजन और प्रति आभार व्यक्त करने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। वर्ष 2026 में पितृ पक्ष की शुरुआत 26 सितंबर 2026 से हो रही है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार, जिन साधकों पर उनके पूर्वजों का आशीर्वाद रहता है, उनके घर का भंडार धन-धान्य से हमेशा भरा रहता है और जीवन की बड़ी परेशानियां दूर रहती हैं। इसके विपरीत, पितरों की नाराजगी से व्यक्ति को 'पितृ दोष' का सामना करना पड़ता है, जिससे करियर, व्यापार में रुकावटें और आर्थिक तंगी घेर लेती हैं।
श्राद्ध से एक दिन पहले ही आवश्यक सामग्री शुद्ध कर लें। पूरे दिन सादगी रखें, तामसिक भोजन वर्जित करें। ब्राह्मण/अतिथि को आदर और विनम्रता से आमंत्रित करें। दक्षिणाभिमुख होकर विधिपूर्वक तर्पण करें। अंत में दीपदान और गौदान अवश्य करें। सबसे बड़ी गलती है अशुद्धता, अनादर और दिखावा। सबसे बड़ा नियम है श्रद्धा और पवित्रता।
क्या आप जानते हैं कि श्राद्ध और तर्पण कर्म संपन्न होने के बाद भी कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है? शास्त्रों में तर्पण के बाद कुछ कार्यों को करने की सख्त मनाही है:

तर्पण के तुरंत बाद विश्राम न करें। श्राद्ध कर्म के लगभग एक पहर (तकरीबन 3 घंटे) बाद ही विश्राम करें। यह नियम घर के बुजुर्गों और अस्वस्थ व्यक्तियों पर लागू नहीं होता। तर्पण के बाद पूर्वजों का स्मरण करें तथा दान-पुण्य जैसे सत्कर्म करें।
क्रोध और गृह-कलह से बनाएं दूरी। घर के बड़े-बुजुर्गों का अपमान करने से बचें, क्योंकि इससे पितृ नाराज हो जाते हैं।

पूजा के तुरंत बाद भोजन ग्रहण न करें। ब्राह्मण, गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों के लिए भोजन का हिस्सा पंचबली निकालें।

तामसिक भोजन व नशीली चीजों का त्याग कर सात्विक आहार ही ग्रहण करें।
